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    होर्मुज से 8.6 लाख मीट्रिक टन तेल लेकर लौट रहे 3 भारतीय टैंकर, आम लोगों को मिलेगी राहत

    पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) के बंद होने की खबरों के बीच भारत के लिए एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर आई है। भारतीय ध्वज वाले तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर स्वदेश वापसी की राह पर हैं। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इन तीनों जहाजों पर कुल 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है और इनमें 94 भारतीय चालक दल (नाविक) सदस्य सवार हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    सुरक्षित निकले तीनों भारतीय जहाजों का विवरण

    होर्मुज के बेहद तनावपूर्ण रास्ते से सुरक्षित निकलने वाले तीन भारतीय तेल टैंकरों का कार्यक्रम और गंतव्य इस प्रकार है:

    • देश वैभव (Desh Vaibhav): 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक के कुल कार्गो का हिस्सा लेकर लौट रहा यह टैंकर 24 जून, 2026 को गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है।
    • देश विभोर (Desh Vibhor): यह जहाज भी 24 जून, 2026 को ही गुजरात के सिक्का पोर्ट पर लंगर डालेगा।
    • सनमार हेराल्ड (Sanmar Herald): शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करने वाला यह तीसरा भारतीय टैंकर 1 जुलाई, 2026 को ओड़िशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचेगा।

    भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार देश के समुद्री हितों और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Lifelines) की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हमारा मंत्रालय भारतीय नाविकों की पूर्ण सुरक्षा की गारंटी के लिए सभी संबंधित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार एक्टिव कोऑर्डिनेशन कर रहा है।

    आम जनता और बाजार को कैसे मिलेगी राहत?

    पश्चिम एशिया में इजरायली हमलों से नाराज होकर ईरान द्वारा होर्मुज जलसंधि को बंद करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जहाजों पर ‘टोल टैक्स’ लगाने की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगने की आशंका थी. भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।

    ऐसे संकट के समय में 8.6 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की यह खेप सुरक्षित भारत पहुंचने से घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। इससे न केवल तेल कंपनियों की चिंताएं दूर होंगी, बल्कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में संभावित उछाल से आम जनता को भी बड़ी राहत मिलेगी।

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