संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और 57 इस्लामी देशों के संगठन ‘ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (OIC) के प्रोपेगैंडा की धज्जियां उड़ा दी हैं। जेनेवा में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव और तेजतर्रार आईएफएस (IFS) अधिकारी अनुपमा सिंह ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर राग अलापने पर दोनों को जमकर लताड़ा।
भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान एक ‘फ्रेंकेंस्टाइन स्टेट’ है: भारत
अनुपमा सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए उसे ‘फ्रेंकेंस्टाइन स्टेट’ (Frankenstein State) करार दिया। उन्होंने कहा:
“यह एक ऐसा देश है जहां खुद इनके मौजूदा रक्षा मंत्री सरकारी नीति के तहत आतंकवादियों को पनाह देने, ट्रेनिंग देने और उन्हें भारत के खिलाफ तैनात करने की बात खुलेआम कबूलते हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता है। यह एक ऐसा विरोधाभास है जो सिर्फ पाकिस्तान ही पेश कर सकता है। यह एक फ्रेंकेंस्टाइन राज्य का जीता-जागता उदाहरण है, जो आज खुद अपने ही पाले हुए मॉन्स्टर (राक्षस) के काटने पर हैरान है।”
ओआईसी (OIC) और कश्मीर पर बड़ा प्रहार
57 मुस्लिम देशों के संगठन OIC द्वारा पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाकर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने सख्त आपत्ति दर्ज कराई।
- ओआईसी के बयान को किया खारिज: भारत ने ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में दिए गए बयानों को पूरी तरह बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया। भारतीय राजनयिक ने कहा कि ओआईसी कॉर्डिनेटर की भूमिका का इस तरह दुरुपयोग केवल इस धोखे और प्रोपेगैंडा को ही बढ़ावा देता है।
- कश्मीर पर स्थायी रुख: अनुपमा सिंह ने भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।” उन्होंने साफ किया कि इस क्षेत्र में एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के भारतीय क्षेत्रों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है, जिसे उसे खाली करना होगा।
पीओजेके (PoJK) में दमनकारी नीतियों को बेनकाब किया
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) के अंतर्गत आने वाले रावलकोट (Rawalakot) और अन्य हिस्सों में चल रहे भारी नागरिक विरोध प्रदर्शनों का जिक्र कर पाकिस्तान को आईना दिखाया।
उन्होंने बताया कि वहां दशकों से चल रहे सैन्य भूमि कब्जों, जनसांख्यिकी बदलाव (Demographic Engineering) और बुनियादी आजादियों के हनन के कारण आज हालात बदतर हो चुके हैं। वहां जनता जब रोटी, बिजली और सम्मान जैसे बुनियादी अधिकारों की मांग करती है, तो पाकिस्तानी हुकूमत उन्हें गोलियों और बर्बरता से दबाती है।
सिंधु जल संधि (IWT) पर कड़ा रुख
आतंकवाद के मुद्दे के साथ ही भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। भारतीय राजनयिक ने कहा कि जो देश अपनी सरकारी नीति के रूप में आतंकवाद का निर्यात करता है, वह सद्भावना और दोस्ती पर आधारित सहयोग के विशेषाधिकारों की मांग नहीं कर सकता। 1960 में हस्ताक्षरित यह संधि अब पुरानी पड़ चुकी है और इसे जलवायु परिवर्तन तथा आज की वास्तविकताओं के हिसाब से पुनर्मूल्यांकन की जरूरत है।


