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    इजरायल के लेबनान पर भीषण हवाई हमले, शांति समझौते पर मंडराया संकट

    पश्चिमी एशिया (West Asia) में जारी तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते (Ceasefire Deal) के बावजूद लेबनान की धरती पर जंग की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार (19 जून 2026) को तड़के इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह (Nabatieh) और आसपास के इलाकों में अब तक के सबसे भीषण हवाई हमले किए। इस ताजा बमबारी में कम से कम 16 से 24 लोगों की मौत हो गई है।

    दूसरी ओर, इजरायल को भी इस मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। आईडीएफ ने आधिकारिक पुष्टि की है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ आमने-सामने की भीषण जंग में उसके चार सैनिक बलिदान (Killed) हो गए हैं, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल (बटालियन कमांडर) भी शामिल हैं।

    शांति समझौते पर मंडराया संकट

    यह भीषण गोलाबारी ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही दिन पहले (15 जून 2026) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच युद्धविराम को लेकर एक अंतरिम समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत रोकने और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने पर सहमति बनी थी।

    इजरायल के इन ताबड़तोड़ हमलों के बाद इस शांति समझौते के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:

    • स्विट्जरलैंड वार्ता टली: स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली स्थायी शांति वार्ता को टाल दिया गया है। खबरों के मुताबिक, लेबनान में इजरायल की बमबारी के विरोध में ईरान ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया।
    • इजरायल का पीछे हटने से इनकार: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाने के वैश्विक दबाव को खारिज कर दिया है। इजरायल का कहना है कि जब तक उत्तरी सीमा से हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, उसके सैनिक दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर अंदर तक अपनी स्थिति मजबूत रखेंगे।
    • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों ने इजरायल से इस संघर्ष विराम का सम्मान करने की अपील की है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका को इजरायली सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ताकि इस समझौते को अक्षुण्ण रखा जा सके।

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक इजरायली हमलों में 3,800 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ताजा हमलों ने यह साफ कर दिया है कि कागजी समझौतों के बावजूद जमीनी स्तर पर युद्धविराम लागू करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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