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    मिडल ईस्ट में लौटी शांति: फ्रांस में हुआ ऐतिहासिक समझौता, ट्रंप और पेजेशकियन ने किए हस्ताक्षर

    पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच हुए एक महत्वपूर्ण शांति समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। फ्रांस के वर्साय (Versailles) में हुए इस ऐतिहासिक समझौते का फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वागत करते हुए इसे सही दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। हालाँकि, इस समझौते के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में विपक्ष और कट्टर समर्थकों (MAGA) की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है।

    समझौते के मसौदे की 14 प्रमुख शर्तें

    इस ऐतिहासिक शांति समझौते के मसौदे में दोनों देशों के बीच सैन्य, आर्थिक और परमाणु नीति से जुड़े कई अहम बिंदु शामिल हैं:

    1. सैन्य गतिविधियों पर रोक: दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ सभी तरह की प्रत्यक्ष या परोक्ष सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकेंगे।
    2. परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी: ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित रखने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी (IAEA) को पूरी पहुंच देने पर सहमत हुआ है।
    3. आर्थिक प्रतिबंधों में राहत: अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा।
    4. ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना: विदेशों में जमी (फ्रीज की गई) ईरान की वित्तीय संपत्तियों को वापस जारी किया जाएगा।
    5. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा: वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
    6. लेबनान और क्षेत्रीय स्थिरता: लेबनान सहित मिडल ईस्ट के अन्य हिस्सों में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों और प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) को बंद किया जाएगा।
    7. ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग: युद्ध और प्रतिबंधों से प्रभावित क्षेत्रों के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के पुनर्निर्माण में सहयोग दिया जाएगा।
    8. कैदियों की अदला-बदली: दोनों देशों की जेलों में बंद एक-दूसरे के नागरिकों और कैदियों की रिहाई की जाएगी।
    9. राजनयिक संबंधों की बहाली: दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए औपचारिक राजनयिक माध्यमों को फिर से मजबूत किया जाएगा।
    10. आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख: क्षेत्र में सक्रिय हिंसक और चरमपंथी संगठनों को मिलने वाले वित्तीय और सैन्य समर्थन को रोकने पर सहमति।
    11. मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण: ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक के विस्तार और परीक्षणों को एक निश्चित दायरे में रखेगा।
    12. साइबर हमलों पर रोक: दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रणालियों पर साइबर हमलों को रोकने की प्रतिबद्धता जताएंगे।
    13. मानवीय सहायता की अनुमति: ईरान में दवाइयों, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक मानवीय सामग्रियों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के सुनिश्चित होगी।
    14. क्षेत्रीय सहयोग परिषद का गठन: समझौते की शर्तों को लागू करने और भविष्य के विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने के लिए एक संयुक्त निगरानी समिति बनाई जाएगी।

    अमेरिका में क्यों हो रहा है विरोध?

    इस ऐतिहासिक समझौते के बाद राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक दबाव में आ गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं और उनके कट्टर ‘मागा’ (MAGA) समर्थकों का मानना है कि ट्रंप ने ईरान के सामने घुटने टेक दिए हैं। विरोधियों का कहना है कि ईरान पर से प्रतिबंध हटाना और उसकी फ्रीज संपत्तियों को वापस करना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। इसके अलावा, इजरायल के सुरक्षा हितों को लेकर भी अमेरिकी गलियारों में चिंताएं जताई जा रही हैं। इसके बावजूद, वैश्विक समुदाय इसे दुनिया की अर्थव्यवस्था और विशेषकर कच्चे तेल के बाजार की स्थिरता के लिए एक गेम-चेंजर मान रहा है।

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