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    Modi-Trump : 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद मुलाकात, भरोसे की कमी और दूरियां ज्यादा

    फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात बेहद ऐतिहासिक है। दोनों वैश्विक नेता पूरे 16 महीने (फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस मुलाकात के बाद) के लंबे अंतराल के बाद आमने-सामने बैठ रहे हैं। इस लंबी अवधि में भारत-अमेरिका के संबंधों में कई नए रणनीतिक उतार-चढ़ाव आए हैं। भू-राजनीतिक (Geopolitical) समीकरणों से लेकर व्यापारिक नीतियों तक, दोनों देशों के बीच काफी कुछ बदला है।

    16 महीनों में क्या-क्या बदला?

    पिछली मुलाकात और वर्तमान परिदृश्य के बीच भारत-अमेरिका संबंधों के बुनियादी ढांचे में 3 बड़े बदलाव आए हैं:

    • ‘भरोसे की कमी’ और रणनीतिक दूरियां: पिछले कुछ महीनों में वैश्विक संघर्षों (विशेषकर पश्चिमी एशिया में मिस्र-ईरान-इजरायल विवाद) को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक रुख में थोड़ा अंतर देखा गया है। अमेरिका की कुछ सख्त नीतियों के कारण रिश्तों में एक ‘भरोसे की कमी’ (Shortage of Trust) का अहसास हुआ, जिसे पीएम मोदी ने जी7 के मंच से भी उठाया।
    • समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) व्यापारिक मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस समुद्री क्षेत्र में हाल ही में हुए संघर्षों में कई निर्दोष भारतीय नाविकों की जान गई है, जिसने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सामरिक सुरक्षा का यह मुद्दा दोनों देशों के बीच नया और बेहद गंभीर है।
    • टैरिफ और व्यापारिक गतिरोध: राष्ट्रपति ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत से आने वाले सामानों पर ऊंचे आयात शुल्क (Tariffs) लगाने और भारत द्वारा उसके जवाब में उठाए गए कदमों के कारण व्यापारिक वार्ताओं में एक ठहराव आ गया था।

    आगामी बातचीत के 4 सबसे बड़े एजेंडे

    इस द्विपक्षीय बैठक के जरिए दोनों नेता पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर ‘रिश्तों को रीसेट’ करने की कोशिश करेंगे। बैठक के मुख्य एजेंडे निम्नलिखित हैं:

    एजेंडामुख्य फोकस क्षेत्र
    व्यापार समझौता (Trade Deal)दोनों देशों के बीच लंबित बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और टैरिफ विवादों को सुलझाना।
    डिफेंस और मिलिट्री सेल्सइंडो-पैसिफिक रीजन में सुरक्षा मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर के सैन्य समझौतों और एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी पर चर्चा।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी एआई मॉडल के आदान-प्रदान के लिए ‘Trusted Partners’ की रूपरेखा तैयार करना।
    वीजा और ऊर्जा सुरक्षाH-1B वीजा नीतियों को लचीला बनाना और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।

    एक्सपर्ट्स का मानना है: डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री हमेशा से बेहद मजबूत रही है। 16 महीने बाद हो रही यह मुलाकात दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक और व्यापारिक हितों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एक संजीवनी का काम करेगी।

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