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    अल-नीनो और महंगाई का अटैक, भारतीय विकास रथ के पहियों को करेगा बेपटरी

    भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी होती दिख रही है। बढ़ती महंगाई और मौसम के बदलते मिजाज यानी ‘अल-नीनो’ (El Niño) के दोहरे प्रभाव के कारण देश की आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। हाल ही में सामने आई एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, इस ‘डबल अटैक’ की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को करीब 5 लाख करोड़ रुपये ($60 बिलियन डॉलर) तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह संकट न केवल देश के कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेगा, बल्कि आम जनता की जेब पर भी सीधा असर डालेगा।

    ग्रामीण मांग और कृषि पर सबसे बड़ी मार

    रिपोर्ट के अनुसार, अल-नीनो के प्रभाव के चलते इस साल मानसून कमजोर रहने या असमान होने की गंभीर आशंका है। भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर है, इसलिए कम बारिश का सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।

    • फसलों की बर्बादी: धान, दालें और तिलहन जैसी मुख्य खरीफ फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
    • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को झटका: कृषि उत्पादन घटने से देश की आधी से अधिक आबादी (जो ग्रामीण इलाकों में रहती है) की आय कम हो जाएगी। इससे ग्रामीण बाजारों में वस्तुओं की मांग काफी घट जाएगी, जो पूरी इकोनॉमी के लिए एक बुरा संकेत है।

    खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल (महंगाई का संकट)

    जब उत्पादन कम होगा, तो बाजार में आपूर्ति (Supply) प्रभावित होगी, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। पहले से ही दूध, सब्जियों और अनाज की ऊंची कीमतों से परेशान आम उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक हो सकती है। खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे लोन और ईएमआई (EMI) महंगी बनी रहेंगी।

    जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट पर दिखेगा असर

    अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस दोहरे संकट के कारण देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास दर में 0.50% से लेकर 0.75% तक की गिरावट आ सकती है। वित्तीय नुकसान के लिहाज से देखें तो यह आंकड़ा लगभग 5 लाख करोड़ रुपये बैठता है। उत्पादन में कमी आने से सरकार को विदेशों से महंगी दरों पर अनाज और खाद्य तेलों का आयात करना पड़ सकता है, जिससे देश का वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) भी बढ़ेगा।

    सरकार और नीति निर्माताओं के लिए चुनौती

    इस आसन्न संकट से निपटने के लिए सरकार और मौसम विभाग (IMD) लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अभी से आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार करनी होंगी, जैसे: कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा देना। सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को मजबूत करना। जमाखोरों पर लगाम लगाना ताकि कृत्रिम महंगाई न बढ़े।

    यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अल-नीनो और महंगाई का यह गठजोड़ चालू वित्त वर्ष में भारतीय विकास रथ के पहियों को धीमा कर सकता है।

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