मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) को लेकर सियासी और कानूनी घमासान चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज (Nomination Rejected) होने के बाद पार्टी ने अब सीधे देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। चुनाव आयोग (Election Commission) से समय रहते कोई ठोस आश्वासन या जवाब न मिलने के कारण कांग्रेस ने गुरुवार (11 जून) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया।
क्यों खारिज हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस ने राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था।
- भाजपा की आपत्ति: नामांकन जांच (Scrutiny) के दौरान भाजपा ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में तेलंगाना (हैदराबाद) में लंबित एक अदालती मामले की जानकारी छुपाई है।
- रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला: भाजपा की इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने नटराजन का नामांकन फॉर्म अधूरा मानकर उसे खारिज कर दिया।
कांग्रेस की कानूनी दलील और चुनाव आयोग का रुख
नामांकन खारिज होने के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला।
- अभिषेक मनु सिंघवी का तर्क: कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को पूरी तरह से “गैर-कानूनी और विकृत” करार दिया। सिंघवी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) की धारा 33A का हवाला देते हुए कहा कि हलफनामे में केवल उन मामलों का खुलासा करना अनिवार्य है जिनमें दो साल से अधिक की सजा हो सकती है या जहां अदालत द्वारा औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय किए जा चुके हों।
- निजी शिकायत का मामला: कांग्रेस का कहना है कि हैदराबाद की अदालत में एक पूर्व महिला कार्यकर्ता द्वारा दी गई केवल एक निजी शिकायत (Private Complaint) लंबित है, जिसमें नटराजन को केवल एक नोटिस जारी हुआ था। यह कोई ऐसा आपराधिक मामला नहीं है जिसे हलफनामे में छिपाया गया माना जाए।
अब सुप्रीम कोर्ट में आर-पार की लड़ाई
गुरुवार को नामांकन वापसी (Withdrawal of Nominations) का आखिरी दिन था। कांग्रेस को उम्मीद थी कि चुनाव आयोग रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलट देगा, लेकिन आयोग की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई न होने पर पार्टी ने आपातकालीन याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट जाने का कदम उठाया।
मध्य प्रदेश का संख्या बल: राज्य की तीन खाली हो रही सीटों में से संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जानी तय मानी जा रही थी। कांग्रेस ने अपने विधायकों को भी एकजुट रहने के निर्देश दिए हैं। यदि नटराजन का नामांकन बहाल नहीं होता है, तो कांग्रेस के हाथ से यह सीट निकल सकती है, जिससे राज्य का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।


