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    अनिल अंबानी को कोर्ट से बड़ी राहत, ‘काला धन अधिनियम’ के तहत कार्रवाई पर रोक

    रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के चेयरमैन अनिल अंबानी (Anil Ambani) को कानूनी मोर्चे पर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) से एक बड़ी और अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने कथित टैक्स चोरी से जुड़े एक मामले में आयकर विभाग द्वारा ‘काला धन अधिनियम’ (Black Money Act) के तहत उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

    विवाद क्या है? (आयकर विभाग के आरोप)

    आयकर विभाग ने 8 अगस्त 2022 को अनिल अंबानी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उन पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया था:

    • कर चोरी का आरोप: विभाग का दावा है कि अनिल अंबानी ने स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में रखे ₹814 करोड़ से अधिक के अघोषित धन पर करीब ₹420 करोड़ की टैक्स चोरी की है।
    • विदेशी संस्थाओं से लिंक: नोटिस के अनुसार, अंबानी बहामास स्थित ‘डायमंड ट्रस्ट’ और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थापित ‘नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड’ (NATU) नामक विदेशी संस्थाओं के लाभकारी स्वामी (Beneficial Owner) थे, जिसे उन्होंने अपने आईटीआर (ITR) में जानबूझकर छिपाया।
    • कड़े कानून का प्रावधान: इन आरोपों के तहत उन पर ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमा चलाने की तैयारी थी, जिसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

    अनिल अंबानी की दलील और कोर्ट का रुख

    अनिल अंबानी ने इस कार्रवाई और काला धन अधिनियम, 2015 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को ही हाई कोर्ट में चुनौती दी है:

    1. पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) का विरोध: अंबानी के वकीलों ने दलील दी कि काला धन अधिनियम साल 2015 में लागू हुआ था, जबकि आयकर विभाग जिन कथित लेन-देन की बात कर रहा है, वे आकलन वर्ष 2006-07 और 2010-11 (अधिनियम के लागू होने से बहुत पहले) के हैं। कानूनन, इस एक्ट को पिछली तारीखों से लागू नहीं किया जा सकता।
    2. हाई कोर्ट की टिप्पणी: कोर्ट ने याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए साफ किया कि जब तक इस रिट याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन (Prosecution) या जुर्माने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    अपील प्रक्रिया जारी रहेगी: अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि अनिल अंबानी के खिलाफ जो आकलन आदेश (Assessment Order) पहले ही पारित हो चुका है, उसके खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष उनकी जो अपील लंबित है, उस पर सुनवाई चलती रहेगी और आदेश भी पारित किए जा सकते हैं, लेकिन उन आदेशों के आधार पर जबरन कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।

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