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    रिकॉर्ड कार्यकाल या महंगाई की मार? PM मोदी के कीर्तिमान पर कांग्रेस के तीखे सवाल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री का कीर्तिमान बनाने पर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने इस रिकॉर्ड कार्यकाल को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए कहा है कि यह कार्यकाल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि आम जनता पर पड़ी कमरतोड़ महंगाई और आर्थिक बर्बादी का प्रतीक है।

    सुरजेवाला का वार: रिकॉर्ड विकास के नहीं जेब काटने के

    रणदीप सुरजेवाला ने पीएम मोदी के 4,399 दिनों के इस सफर पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने रिकॉर्ड तो जरूर बनाए हैं, लेकिन वे रिकॉर्ड देश के विकास के नहीं बल्कि जनता की जेब काटने के हैं।

    • महंगाई की दोहरी मार: सुरजेवाला के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देश के मध्यम वर्ग और गरीब जनता पर टैक्स और महंगाई का ऐसा बोझ लादा गया है जिससे उबर पाना नामुमकिन हो गया है। खाद्य पदार्थों से लेकर बुनियादी जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।
    • पेट्रोल-डीजल के दाम: कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में जनता को कोई राहत नहीं दी गई। पेट्रोल और डीजल पर भारी एक्साइज ड्यूटी लगाकर सरकार ने अपनी तिजोरी भरी है, जबकि आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था और विपक्ष के गंभीर आरोप

    अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सुरजेवाला ने पीएम मोदी के इस कार्यकाल के दौरान देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कई गंभीर आंकड़े और आरोप सामने रखे हैं:

    विपक्ष के अनुसार मोदी कार्यकाल की 'आर्थिक तस्वीर':
    -घरेलू रसोई गैस (LPG) और ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी।
    -डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) का अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना।
    -युवाओं के सामने पिछले कई दशकों की सबसे भयावह बेरोजगारी की स्थिति।
    
    1. रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: कांग्रेस ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दिनों की संख्या भले ही बढ़ रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की साख और कीमत लगातार गिरती जा रही है।
    2. कर्ज का बोझ: सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में देश पर कर्ज का बोझ कई गुना बढ़ गया है। विकास के बड़े-बड़े दावों के पीछे केवल चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर किसान और छोटे व्यापारी बदहाली की कगार पर हैं।

    राजनीतिक मायने

    भाजपा जहाँ एक तरफ पीएम मोदी के इस कीर्तिमान को देश की स्थिरता, मजबूत नेतृत्व और जन-कल्याण का प्रमाण बताकर जश्न मना रही है, वहीं कांग्रेस ने इस मौके को ‘आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता’ के रूप में देश के सामने रखने की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक इतिहास में कार्यकाल की लंबाई से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस कार्यकाल ने देश की जनता को क्या दिया।

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