देश के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के गुस्से को सोशल मीडिया से जमीन पर उतारते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। हाल ही में हुए नीट (NEET-UG) पेपर लीक और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं से जुड़ी अन्य अनियमितताओं को लेकर युवाओं का यह गुस्सा शनिवार को भीषण गर्मी के बावजूद सड़कों पर दिखाई दिया।
‘ये तो सिर्फ ट्रेलर था’: अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अमेरिका से लौटकर सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे दीपके ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा, “कल, हममें से हजारों लोगों ने इतिहास रचा। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने सरकार को एक ‘ट्रेलर’ दिखा दिया है कि जब सारे कॉकरोच एकजुट होते हैं, तो वे क्या कर सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले अधिकांश युवा ऐसे थे जिन्होंने जीवन में पहली बार किसी आंदोलन में हिस्सा लिया है, जो शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनके गहरे आक्रोश को दर्शाता है।
सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम और मांगें
प्रदर्शन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी (CJP) के प्रवक्ताओं ने सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखीं और 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: संगठन की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
- बर्खास्तगी की चेतावनी: यदि शिक्षा मंत्री स्वयं सम्मानपूर्वक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें तुरंत मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए।
- देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी: यदि 7 दिनों के भीतर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं आता है, तो यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर पूरे देश में फैल जाएगा और हर हफ्ते बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
‘कितनी बार आएगी, पेपर लीक की सरकार’
जंतर-मंतर पर हुए इस अनूठे प्रदर्शन में शामिल युवा कॉकरोच के मुखौटे (Masks) पहने हुए थे और हाथों में तख्तियां लेकर “कितनी बार आएगी, पेपर लीक की सरकार” जैसे नारे लगा रहे थे। इस आंदोलन को लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी पूरा समर्थन मिला, जो मंच पर अभिजीत दीपके के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए।
विभिन्न राज्यों (जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र) से आए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का कहना था कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने छात्रों को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है और अब सरकार को इसकी जवाबदेही लेनी ही होगी.


