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    उत्तर प्रदेश चुनाव में साथ आएंगे सपा-कांग्रेस, सीट शेयरिंग फॉर्मूले में होगा बदलाव?

    उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े चुनावी उलटफेर की जमीन तैयार हो गई है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दोनों दलों के एक साथ आने से राज्य में सीटों के समीकरण पूरी तरह बदलने वाले हैं, जिससे सत्तारूढ़ भाजपा के सामने कड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

    सीटों के समीकरणों में बड़ा बदलाव

    • मजबूत गठबंधन की ओर: पिछले लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच बने बेहतर तालमेल और सकारात्मक नतीजों को देखते हुए नेतृत्व इस बार विधानसभा चुनाव में भी इसे दोहराने के पक्ष में है।
    • सीटों का नया बंटवारा: कांग्रेस के साथ आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक सपा अपने पुराने सीट शेयरिंग फॉर्मूले में बदलाव करेगी। जहां कांग्रेस को उसकी मजबूत पकड़ वाली सीटें दी जा सकती हैं, वहीं सपा खुद बड़ी हिस्सेदारी के साथ मैदान में उतरेगी।

    चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुख्य मुद्दे

    भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरने के लिए समाजवादी पार्टी ने इस बार जमीनी और जनता से सीधे जुड़े मुद्दों को उठाने की रणनीति बनाई है:

    • पीडीए (PDA) का फॉर्मूला: सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस बार भी अपने मुख्य एजेंडे ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक कार्ड को फ्रंट पर रखेंगे। पार्टी का मानना है कि इस जातिगत समीकरण के जरिए भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाई जा सकती है।
    • बेरोजगारी और पेपर लीक: युवाओं को साधने के लिए सपा सरकारी नौकरियों की कमी, बढ़ती बेरोजगारी और हाल के वर्षों में हुए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों को बड़ा मुद्दा बनाएगी।
    • महंगाई और किसान कल्याण: रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती महंगाई के साथ-साथ किसानों को फसलों का सही दाम (MSP) न मिलने और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर ग्रामीण इलाकों में आक्रामक प्रचार किया जाएगा।
    • कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता: सपा स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार, पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

    राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सपा और कांग्रेस का यह गठबंधन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में सफल रहता है, तो यह उत्तर प्रदेश के त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले को सीधे ‘एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन’ की आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील कर देगा।

    पश्चिमी यूपी में बदलेंगे समीकरण

    खासकर मेरठ और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में, जहां रालोद (RLD) के पाला बदलने के बाद समीकरण बदले थे, वहां अब सपा-कांग्रेस का यह संयुक्त मोर्चा नए सिरे से मुस्लिम-दलित और जाट-पिछड़ा वर्ग के समीकरणों को साधने की कोशिश करेगा। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच जल्द ही सीट शेयरिंग को लेकर औपचारिक बैठकें शुरू होने की उम्मीद है।

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