More
    HomeHindi NewsBusinessLPG की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज, पेट्रोल और डीजल की बिक्री...

    LPG की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज, पेट्रोल और डीजल की बिक्री में उछाल

    मई महीने के ईंधन बिक्री के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जिसमें एक बेहद हैरान करने वाला ट्रेंड देखने को मिला है। जहां एक तरफ रसोई गैस (LPG) की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों— इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के शुरुआती आंकड़ों के आधार पर स्थिति निम्नलिखित है:

    रसोई गैस (LPG) की बिक्री 24% गिरी

    सालाना आधार (Year-on-Year) पर मई में एलपीजी (LPG) की बिक्री में 24% की भारी गिरावट आई है। अप्रैल महीने में भी एलपीजी की बिक्री में करीब 16% की कमी देखी गई थी। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहा तनाव और संघर्ष है, जिसके चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई थी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। आपूर्ति सीमित होने के कारण कंपनियों ने होटलों और औद्योगिक उपभोक्ताओं (Commercial Users) को होने वाली सप्लाई में कटौती की, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की किल्लत न हो। इसके अलावा, सिलेंडर रीफिलिंग के बीच का समय (Interval) भी बढ़ा दिया गया था।

    पेट्रोल और डीजल की बिक्री में उछाल

    एलपीजी के उलट, मई महीने में वाहनों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की मांग काफी मजबूत रही:

    • पेट्रोल की बिक्री: सालाना आधार पर इसमें 4.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
    • डीजल की बिक्री: डीजल की मांग में 6.4% का बड़ा उछाल देखा गया। आमतौर पर डीजल की खपत का बेस बहुत बड़ा होने के कारण इसकी ग्रोथ धीमी रहती है, लेकिन मई में इसने पेट्रोल को भी पीछे छोड़ दिया।
    • एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF): हवाई ईंधन की बिक्री में भी सालाना आधार पर 1.8% की वृद्धि हुई है।

    ईंधन की बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण

    मई के महीने में पेट्रोल-डीजल की इस तेज रफ्तार के पीछे कुछ प्रमुख कारक जिम्मेदार रहे हैं:

    • भीषण गर्मी और एयर कंडीशनिंग (AC) का उपयोग: मई के दौरान देश के बड़े हिस्से में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। भयंकर गर्मी के कारण कारों और बसों में लगातार एसी चलने से गाड़ियों का ईंधन कंजम्पशन काफी बढ़ गया।
    • कृषि क्षेत्र से बढ़ती मांग: मई का महीना खरीफ फसलों की बुआई का पीक सीजन होता है। इस दौरान गांवों में ट्रैक्टरों, सिंचाई पंपों और कृषि से जुड़े लॉजिस्टिक्स में डीजल की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
    • बल्क कंज्यूमर्स का रिटेल पंपों पर शिफ्ट होना: कई जगहों पर थोक में डीजल खरीदने वाले बड़े उपभोक्ताओं (Bulk Consumers) ने सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदना शुरू कर दिया, क्योंकि वहां उन्हें ईंधन थोड़ा सस्ता मिल रहा था। इससे सरकारी पेट्रोल पंपों पर अचानक डीजल की बिक्री काफी बढ़ गई।

    ये आंकड़े देश के 90% हिस्से पर नियंत्रण रखने वाली सरकारी तेल कंपनियों के हैं। निजी क्षेत्र (Private Retailers) के डेटा शामिल होने के बाद अगले एक हफ्ते में जब तेल मंत्रालय अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा, तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments