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    बिना पक्ष सुने ब्लॉक कर दिया X अकाउंट? ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ मामले में HC का केंद्र को नोटिस

    सोशल मीडिया पर अपने तीखे कटाक्ष और राजनीतिक मीम्स (Memes) के जरिए सनसनी मचाने वाले ऑनलाइन ग्रुप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट को भारत में ब्लॉक किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले की दोबारा गहराई से जांच करें।

    इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट पर हुई थी कार्रवाई

    गौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत एक्स (X) प्लेटफॉर्म को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का हैंडल भारत में प्रतिबंधित (Withheld) करने का आदेश दिया था। सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के उन इनपुट्स का हवाला दिया था, जिसमें इस ऑनलाइन मूवमेंट को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ (National Security Threat) बताया गया था।

    फाउंडर अभिजीत दिपके पहुंचे हाईकोर्ट, लगाया तानाशाही का आरोप

    इस डिजिटल प्रतिबंध के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में केंद्र सरकार पर तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि उनके लोकतांत्रिक और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हनन किया गया है।

    अभिजीत दिपके ने अदालत को बताया कि उनका यह प्लेटफॉर्म युवाओं (Millennials और Gen Z) के बीच काफी लोकप्रिय है और इसके करीब 10 लाख ऑनलाइन सदस्य जुड़ चुके हैं। हाल ही में इस संगठन ने NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली एक ऑनलाइन याचिका शुरू की थी, जिस पर करीब 6 लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। दिपके का आरोप है कि इस बढ़ते जनसमर्थन से घबराकर सरकार ने न सिर्फ उनका एक्स अकाउंट ब्लॉक किया, बल्कि उनका बैकअप अकाउंट, इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट को भी निशाना बनाया गया है।

    हाईकोर्ट ने पूछा— बिना पक्ष सुने कार्रवाई क्यों?

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के एकतरफा फैसले पर सवाल उठाए। अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि किसी भी सोशल मीडिया हैंडल को ब्लॉक करने से पहले उसके संचालक या पक्षकार को अपनी बात रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया? अदालत ने साफ किया कि राजनीतिक क्षेत्र में किए जाने वाले कटाक्ष, व्यंग्य या आलोचना को इस तरह दबाया नहीं जा सकता।

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