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    ‘धुरंधर’ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, ब्लॉकबस्टर फिल्म इसलिए विवादों में फंसी?

    1000 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्डतोड़ कमाई करने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar 2) अब एक बड़े कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विवाद में फंस गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को इस फिल्म की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।

    यह आदेश कोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक हेड कांस्टेबल (सैन्यकर्मी) दीपक कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि फिल्म देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

    याचिका में सैन्यकर्मी ने क्या लगाए हैं आरोप?

    एसएसबी (SSB) के जवान दीपक कुमार ने कोर्ट में दलील दी कि फिल्म ‘धुरंधर 2’ में मनोरंजन के नाम पर बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक कर दी गई हैं। याचिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    • सैन्य अभियानों की गोपनीयता भंग: याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म में भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) के वास्तविक ऑपरेशन्स और उनकी रणनीतिक कार्यप्रणाली (Operational Details) को बेहद बारीकी से दिखाया गया है, जो ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ (Official Secrets Act) का सीधा उल्लंघन है।
    • गोपनीय ठिकानों का खुलासा: फिल्म में कुछ ऐसे संवेदनशील लोकेशन्स और सैन्य चरित्रों को दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर देश के उच्च पदस्थ अधिकारियों और शहीद सैनिकों से मेल खाते हैं।
    • DRDO रिसर्च का जिक्र: याचिका में यह भी दावा किया गया है कि फिल्म में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा गुप्त रूप से तैयार की जा रही दवाओं/रसायनों के विवरण को भी उजागर किया गया है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की गंभीर टिप्पणी

    दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

    हाई कोर्ट का रुख: कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “भले ही यह फिल्म एक काल्पनिक कहानी (Work of Fiction) और कल्पना पर आधारित हो और इसे केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया हो, लेकिन समाज और देश की सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। एक सुरक्षाकर्मी द्वारा उठाए गए इन संवेदनशील मुद्दों को पूरी तरह से आधारहीन नहीं माना जा सकता।”

    अब आगे क्या होगा?

    हाई कोर्ट ने इस मामले में खुद दखल देने के बजाय केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड को जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी (CBFC) याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए इन सभी बिंदुओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं की बारीकी से समीक्षा करें और तय समय सीमा के भीतर इस पर उचित कानूनी निर्णय लें।

    रणवीर सिंह स्टारर और आदित्य धर के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म के मेकर्स के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि फिल्म हाल ही में सिनेमाघरों के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (Netflix और JioHotstar) पर रिलीज हुई है। यदि जांच में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो फिल्म के प्रसारण पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

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