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    समुद्र को ही पीछे धकेल दिया, PM मोदी ने नीदरलैंड में देखी जादुई दीवार, भारत में भी होगा प्रयोग

    ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण जहां दुनिया के कई तटीय देशों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है, वहीं नीदरलैंड ने अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग के दम पर समुद्र को ही पीछे धकेल दिया है। नीदरलैंड का लगभग एक-तिहाई हिस्सा समुद्र तल से नीचे है। खुद को डूबने से बचाने के लिए इस देश ने उत्तर सागर (North Sea) में एक 32 किलोमीटर लंबी विशालकाय समुद्री दीवार बनाई है, जिसे ‘अफस्लूइतडाइक’ (Afsluitdijk) कहा जाता है। यह जादुई दीवार और डच वाटर मैनेजमेंट मॉडल अब भारत के लिए भी वरदान साबित हो सकता है।

    क्या है नीदरलैंड की 32KM लंबी ‘जादुई दीवार’?

    नीदरलैंड ने साल 1927 से 1932 के बीच इस ऐतिहासिक बांध का निर्माण किया था। यह केवल एक दीवार नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है।

    • खारे पानी को मीठे पानी में बदला: इस 32 किलोमीटर लंबी दीवार ने समुद्र के एक बड़े हिस्से (Zuiderzee) को मुख्य सागर से अलग कर दिया। समय के साथ, नदियों के पानी के प्रवाह से यह खारा जल क्षेत्र एक विशाल मीठे पानी की झील में बदल गया, जिसे अब ‘इज्सेलमीर’ (IJsselmeer) कहा जाता है।
    • बाढ़ से सुरक्षा और भूमि विकास: इस बांध ने देश के एक बड़े हिस्से को विनाशकारी समुद्री बाढ़ से हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया। इतना ही नहीं, नीदरलैंड ने समुद्र से जमीन छीनकर (Polders) खेती और रिहाइश के लिए नए इलाके विकसित कर लिए।

    भारत में ‘कल्पसर परियोजना’ और पीएम मोदी का विजन

    भारत भी अपने तटीय क्षेत्रों में पानी के संकट और बाढ़ से निपटने के लिए इसी डच वाटर मॉडल का अध्ययन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद नीदरलैंड के इस बांध का दौरा किया था और भारत की महत्वाकांक्षी ‘कल्पसर परियोजना’ (Kalpasar Project) के लिए इसे एक आदर्श मॉडल माना है।

    गुजरात की कल्पसर परियोजना: कल्पसर परियोजना के तहत गुजरात में खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) के आर-पार एक विशाल समुद्री बांध बनाने की योजना है। इस बांध की लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    यह परियोजना भारत में जल क्रांति कैसे ला सकती है, इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    1. दुनिया का सबसे बड़ा मीठे पानी का जलाशय: इस बांध के बनने से खंभात की खाड़ी का खारा पानी, नर्मदा, साबरमती, माही और ढाढर जैसी नदियों के मीठे पानी के जुड़ाव से एक विशाल मीठे पानी की झील में तब्दील हो जाएगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित तटीय जलाशय होगा।
    2. सौराष्ट्र को मिलेगा जीवनदान: इस जलाशय से गुजरात के सूखाग्रस्त सौराष्ट्र क्षेत्र की पानी की किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और भूजल स्तर में भारी सुधार होगा।
    3. सड़क और रेल परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव: इस 30 किमी लंबे बांध के ऊपर 10-लेन का हाईवे और एक रेलवे ट्रैक बनाने का प्रस्ताव है। इससे दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी लगभग 200 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे समय और ईंधन की भारी बचत होगी।
    4. रिन्यूएबल एनर्जी हब: इस बांध के साथ विशाल सौर और पवन ऊर्जा (Solar and Wind Energy) पार्क स्थापित किए जाएंगे, जो राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करेंगे।

    नीदरलैंड की यह तकनीक साबित करती है कि अगर सही कूटनीति और इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाए, तो प्रकृति की चुनौतियों को भी विकास के बड़े अवसर में बदला जा सकता है।

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