प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई मिली है। हेग में आयोजित शिखर सम्मेलन में भारत और नीदरलैंड्स ने तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, और खनिज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 बड़े समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
1. सेमीकंडक्टर और हाई-टेक पार्टनरशिप
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हुआ रणनीतिक समझौता है। नीदरलैंड्स, जो वैश्विक स्तर पर चिप बनाने वाली अग्रणी मशीनों (जैसे ASML) का केंद्र है, भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।
- दोनों देश चिप डिजाइन, अनुसंधान और विकास (R&D) और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को लचीला बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
- इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
2. महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) की आपूर्ति
हरित ऊर्जा (Green Energy) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के भविष्य को देखते हुए दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और प्रसंस्करण के लिए हाथ मिलाया है। इस साझेदारी से भारत को लिथियम, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Elements) की निर्बाध आपूर्ति सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
3. स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान (Healthcare)
स्वास्थ्य क्षेत्र में, दोनों देशों ने डिजिटल स्वास्थ्य समाधान और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके तहत कैंसर अनुसंधान, संक्रामक रोगों से निपटने के लिए वैक्सीन विकास और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
4. शिक्षा और कौशल विकास (Education & Skill Development)
उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के शीर्ष विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मंजूरी दी गई है:
- भारतीय और डच संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं (Joint Research Projects) की शुरुआत की जाएगी।
- सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में विशेष कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
5. सतत विकास और अन्य क्षेत्र
पारंपरिक रूप से मजबूत जल प्रबंधन (Water Management) और कृषि सहयोग के अलावा, इस बार हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) पर भी विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी, विशेषकर सेमीकंडक्टर और भविष्य की तकनीकों के मामले में।


