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    ‘अल नीनो’ का साया: उत्तर-मध्य भारत में सूखे की आशंका, दक्षिण भारत में बाढ़ का खतरा

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमानों के आधार पर देश में इस साल के मानसून और उससे जुड़े भौगोलिक प्रभावों की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:

    मानसून का समय से पहले आगमन

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय (1 जून) से छह दिन पहले, यानी 26 मई 2026 को केरल के तट पर दस्तक दे सकता है। सांख्यिकीय मॉडल के आधार पर इसमें चार दिन का मार्जिन (आगे या पीछे) माना गया है। वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों, अंडमान सागर और निकोबार द्वीप समूह में मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।


    दक्षिण भारत में बाढ़ का खतरा और भारी बारिश

    मानसून के जल्द आगमन और तीव्र शुरुआती हलचल के कारण देश के दक्षिणी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    • तटीय क्षेत्र और केरल: केरल के अधिकांश हिस्सों और लक्षद्वीप में अगले कुछ दिनों तक आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है।
    • बाढ़ की आशंका: पश्चिमी तट और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में शुरुआती दौर में तीव्र मानसूनी स्पेल (Surge) के चलते जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने तटीय जिलों के लिए येलो अलर्ट और मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है।

    उत्तर और मध्य भारत में सूखे की आशंका: ‘अल नीनो’ का साया

    एक तरफ जहां दक्षिण भारत में भारी बारिश का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत के लिए इस साल चिंताजनक स्थिति बन रही है।

    • कम बारिश का अनुमान: इस साल देश में मानसूनी बारिश अपने दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92 फीसदी रहने की संभावना है, जिसे ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में रखा जाता है। भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर औसत मानसूनी बारिश लगभग 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इसके काफी कम रहने की आशंका है।
    • सूखे की बढ़ती संभावना: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून और जुलाई के दौरान प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) परिघटना के पूरी तरह सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। इस वजह से देश में सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35 फीसदी तक पहुंच गई है, जो सामान्य वर्षों के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक है। इसके चलते उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून सीजन के दौरान गंभीर सूखे की आशंका जताई जा रही है।

    आर्थिक और कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव

    उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी का सीधा असर देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है:

    • धान, दालें, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है।
    • बारिश कम होने से ग्रामीण आय, बिजली की मांग (सिंचाई के लिए) और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर सीधा दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यापक आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

    इस भयावह सूखे की आशंका के बीच ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (IOD) के रूप में एक उम्मीद की किरण मौजूद है। यदि मानसून के आखिरी महीनों (अगस्त-सितंबर) में सकारात्मक आईओडी (Positive IOD) सक्रिय होता है, तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है।

    वर्तमान में उत्तर प्रदेश (जैसे बांदा में तापमान 44.8°C), झांसी और मध्य भारत के कई हिस्सों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, जिससे लोग भीषण लू और गर्मी का सामना कर रहे हैं।

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