पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर अडिग हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। यहाँ मामले से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं:
ममता बनर्जी का कड़ा रुख
चुनाव नतीजों में भाजपा को 207 सीटें और TMC को मात्र 80 सीटें मिलने के बावजूद ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं सौंपेंगी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:
”मैं इस्तीफा क्यों दूँ? हम हारे नहीं हैं, बल्कि जनादेश को लूटा गया है। यह चुनाव निष्पक्ष नहीं था, चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर साजिश रची है।”
प्रमुख आरोप और संवैधानिक संकट
ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
- धांधली का आरोप: उन्होंने दावा किया कि करीब 100 सीटों पर वोटों की लूट हुई है और केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया।
- चुनाव आयोग पर हमला: सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को “खलनायक” बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने एकतरफा खेल खेला।
- हटाने की चुनौती: उन्होंने राज्यपाल और केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “अगर मुझे हटाना है तो हटा दें, लेकिन मैं खुद से मैदान छोड़कर नहीं जाऊंगी।”
सियासी पारा और आगे की राह
ममता बनर्जी के इस फैसले से बंगाल में एक बड़ा संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) खड़ा हो गया है।
- भाजपा की प्रतिक्रिया: भाजपा ने ममता के रुख को ‘संवैधानिक ईशनिंदा’ और लोकतंत्र का अपमान बताया है। शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से हराया है, ने कहा कि संविधान के अनुसार बहुमत खोने वाले मुख्यमंत्री को पद छोड़ना ही होगा।
- राज्यपाल की भूमिका: माना जा रहा है कि यदि ममता इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल आर.एन. रवि उन्हें बर्खास्त करने या अनुच्छेद 164 के तहत कार्रवाई करने पर विचार कर सकते हैं।
ममता बनर्जी ने अब ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के साथ मिलकर आगे की लड़ाई लड़ने और सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का ऐलान किया है। फिलहाल, बंगाल की सत्ता की चाबी भाजपा के पास जाती दिख रही है, लेकिन ममता के “अडिग” रवैये ने शपथ ग्रहण से पहले के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।


