ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक रस्साकशी के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान द्वारा भेजे गए 14-सूत्रीय प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ा या कोई ‘गलती’ की, तो सैन्य हमले फिर से शुरू किए जा सकते हैं।
ट्रंप का सख्त संदेश: ‘सैन्य विकल्प अभी भी खुले हैं’
फ्लोरिडा में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए अमेरिका कोई जल्दबाजी में नहीं है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि पिछले हमलों (28 फरवरी, 2026) के बाद अगर ईरान ने स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की, तो उसे और भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप का यह बयान ईरान के उस 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के जवाब में आया है, जिसे ओमान और पाकिस्तान के जरिए वाशिंगटन पहुंचाया गया था।
परमाणु क्षमता पर कड़ी नजर
ट्रंप प्रशासन का मुख्य ध्यान ईरान की परमाणु क्षमता (Nuclear Capacity) को पूरी तरह से समाप्त करने या उस पर कड़ा नियंत्रण पाने पर है।
- असंतोष: ट्रंप ने कहा कि ईरान का नया प्रस्ताव परमाणु मुद्दे पर “धुंधला” है।
- खतरे का आकलन: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान यूरेनियम संवर्धन के उस स्तर के करीब है, जहां से परमाणु हथियार बनाना संभव हो सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि “हम ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं बनने दे सकते।”
प्रमुख विवादित मुद्दे
- प्रतिबंध और मुआवजा: ईरान ने मांग की है कि अमेरिका उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए और हालिया सैन्य हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करे। ट्रंप ने इन मांगों को “हास्यास्पद” बताया है।
- होर्मुज नाकाबंदी: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने के बदले क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी की मांग की है।
- बैलिस्टिक मिसाइलें: अमेरिका चाहता है कि समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल किया जाए, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का हिस्सा बताकर बातचीत से बाहर रख रहा है।
मौजूदा स्थिति और तनाव
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद से ही मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। अप्रैल में एक अस्थायी युद्धविराम तो हुआ, लेकिन होर्मुज की तनातनी ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
ट्रंप के ताजा बयान ने शांति वार्ता की उम्मीदों को फिलहाल कम कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि ईरान केवल समय काटने की कोशिश कर रहा है और वे तब तक किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जब तक कि उन्हें “पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत” डील नहीं मिलती।
अगला कदम क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कड़ा रुख ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईरान अपने प्रस्ताव में बदलाव करता है या फिर होर्मुज में तनाव एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले लेता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इन दोनों देशों के बीच छिड़ी इस ‘कोल्ड वॉर’ पर टिकी हैं।


