भारत की जांच एजेंसियों को अंडरवर्ल्ड और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी और डी-कंपनी के प्रमुख गुर्गे सलीम डोला (Salim Dola) को भारत वापस लाया गया है।
सलीम डोला को मंगलवार को तुर्किये से डिपोर्ट कर भारत लाया गया। डोला के दिल्ली पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में ले लिया। वर्तमान में दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सौंप दिया जाएगा, क्योंकि डोला अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का एक मुख्य हिस्सा रहा है।
कौन है सलीम डोला?
सलीम डोला को डी-कंपनी का ‘फाइनेंस मैनेजर’ और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का ‘मास्टरमाइंड’ माना जाता है। डोला लंबे समय से दुबई और कराची के बीच सक्रिय था। वह दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के सीधे संपर्क में था। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि डोला ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और टेरर फंडिंग के लिए करता था।
प्रमुख आरोप और मामले
सलीम डोला के खिलाफ भारत में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ‘लैंडिंग पॉइंट्स’ और ‘डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क’ तैयार करने का मुख्य आरोपी है। मुंबई और दिल्ली के बिल्डरों से डी-कंपनी के नाम पर वसूली करने में भी उसकी सक्रिय भूमिका रही है। वह फर्जी पासपोर्ट और पहचान पत्रों के जरिए खाड़ी देशों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।
जांच का दायरा और महत्व
सलीम डोला का भारत लाया जाना डी-कंपनी के वैश्विक नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- नई कड़ियां जुड़ेंगी: डोला से पूछताछ के दौरान भारत में छिपे डी-कंपनी के ‘स्लीपर सेल्स’ और ड्रग पेडलर्स के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
- लॉरेंस बिश्नोई और अन्य गैंग्स: एजेंसियां यह भी जांच करेंगी कि क्या डोला का नेटवर्क हाल के वर्षों में सक्रिय हुए नए गैंगस्टर समूहों (जैसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग) के साथ किसी भी तरह के समन्वय में था।
सलीम डोला की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक दबाव का परिणाम है। उसकी गवाही से न केवल दाऊद इब्राहिम के मौजूदा ठिकानों की पुष्टि हो सकती है, बल्कि भारत में फैले नशे के काले कारोबार पर भी गहरी चोट की जा सकेगी।


