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    7 साल बाद भारत आएंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, गलवान संघर्ष के बाद पहली यात्रा होगी

    भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और राजनयिक हलचलों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 82 महीनों (लगभग 7 साल) के लंबे अंतराल के बाद 2026 में भारत का दौरा कर सकते हैं। यह यात्रा भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान संभावित है।

    ऐतिहासिक संदर्भ और अंतराल

    शी जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में ‘अनौपचारिक शिखर सम्मेलन’ के लिए तमिलनाडु के मामल्लपुरम आए थे। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया था। यदि वे 2026 में भारत आते हैं, तो यह गलवान संघर्ष के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

    ब्रिक्स 2026: एक बड़ा मंच

    भारत साल 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। हाल ही में चीन ने भारत की इस अध्यक्षता का समर्थन किया है।

    • पीएम मोदी का निमंत्रण: अगस्त 2025 में तियानजिन (चीन) में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग को भारत आने का न्योता दिया था।
    • चीनी विदेश मंत्री का दौरा: शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए चीनी विदेश मंत्री वांग यी के भी मई 2026 में भारत आने की संभावना है।

    क्या प्रगाढ़ होंगे संबंध?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। 2024 के अंत में लद्दाख में ‘डिसएंगेजमेंट’ (सैनिकों की वापसी) पर बनी सहमति ने इस दौरे की नींव रखी है। दोनों देश सीधी उड़ानों की बहाली और वीजा नियमों में ढील देने पर विचार कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर भी चर्चा हो रही है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों और वैश्विक अस्थिरता के बीच, ब्रिक्स देश (विशेषकर भारत और चीन) एक मजबूत आर्थिक ब्लॉक के रूप में एकजुट होना चाहते हैं।

    चुनौतियां अब भी बरकरार

    हालांकि संबंधों में सुधार के संकेत हैं, लेकिन सीमा पर विश्वास की कमी और अरुणाचल प्रदेश जैसे मुद्दों पर चीन के विवादास्पद बयान अभी भी बड़ी बाधाएं हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीमा पर पूर्ण शांति नहीं होगी, द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह ‘सामान्य’ नहीं हो सकते।

    शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच “कोल्ड वॉर” को खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को गति देगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।

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