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रूस ने अमेरिका को दिया साफ संदेश, ईरान को डराने-धमकाने की कोशिशें बेकार

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच रूस ने ईरान का पुरजोर समर्थन करते हुए अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मॉस्को दौरे के दौरान रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईरान को डराने-धमकाने या ‘शक्ति के प्रदर्शन’ के जरिए झुकाने की कोशिशें पूरी तरह विफल साबित होंगी।

अराघची का मॉस्को दौरा और कूटनीतिक संकेत

ईरानी विदेश मंत्री अराघची का यह मॉस्को दौरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • रक्षा सहयोग: इस बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ‘रणनीतिक साझेदारी समझौते’ पर चर्चा हुई।
  • साझा मोर्चा: अराघची ने रूसी नेतृत्व के साथ इजरायल द्वारा किए जा रहे संभावित हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन मंत्रणा की। रूस ने संकेत दिया है कि वह ईरान की संप्रभुता के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान का विरोध करेगा।

रूस का बड़ा बयान: ‘ब्लैकमेल काम नहीं करेगा’

रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा ईरान को सैन्य रूप से घेरने और प्रतिबंधों के जरिए ‘ब्लैकमेल’ करने की रणनीति पुरानी हो चुकी है। रूस के अनुसार:

  1. ईरान की स्थिरता: तेहरान को ताकत के बल पर बातचीत की मेज पर नहीं लाया जा सकता।
  2. क्षेत्रीय संतुलन: पश्चिम एशिया में शांति तब तक संभव नहीं है जब तक ईरान के सुरक्षा हितों को नजरअंदाज किया जाता रहेगा।
  3. सैन्य सहायता: हालांकि रूस ने सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने की बात नहीं की, लेकिन रक्षा क्षेत्र में ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इजरायल-ईरान युद्ध की आहट

इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु और तेल ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों के बीच रूस की यह सक्रियता तनाव को और बढ़ा सकती है। विशेषज्ञ इसे ‘कोल्ड वॉर’ जैसी स्थिति मान रहे हैं, जहाँ रूस खुले तौर पर ईरान के पीछे खड़ा नजर आ रहा है।

  • रूस की चिंता: मॉस्को को डर है कि यदि ईरान पर बड़ा हमला होता है, तो इसका असर पूरे काकेशस क्षेत्र और रूसी प्रभाव वाले इलाकों पर पड़ेगा।
  • मिसाइल डिफेंस: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान रूस से आधुनिक S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जल्द आपूर्ति की मांग कर रहा है, ताकि इजरायली हवाई हमलों का मुकाबला किया जा सके।

वैश्विक परिणाम

रूस और ईरान की यह बढ़ती नजदीकी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। यदि रूस सक्रिय रूप से ईरान की रक्षा में उतरता है, तो यह युद्ध केवल क्षेत्रीय न रहकर वैश्विक संघर्ष का रूप ले सकता है।

अराघची का मॉस्को दौरा यह साबित करता है कि ईरान अलग-थलग नहीं है। रूस के कड़े रुख ने इजरायल और अमेरिका को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ईरान पर किसी भी बड़े हमले के कूटनीतिक और सैन्य परिणाम क्या हो सकते हैं। फिलहाल, मॉस्को और तेहरान का ‘नया गठबंधन’ पश्चिम एशिया के भविष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

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