पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को रैली से ठीक पहले उत्तर 24 परगना जिले का जगद्दल इलाका युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। यहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों के बीच भीषण हिंसक झड़प हुई, जिसमें देसी बमों के इस्तेमाल से इलाके में दहशत फैल गई है।
हिंसा का घटनाक्रम और बमबाजी
यह हिंसा उस समय भड़की जब प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा की तैयारियां अंतिम चरण में थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उपद्रवियों ने देसी बमों का इस्तेमाल किया। इस बमबाजी में कम से कम 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बमों के धमाकों के बाद पूरे जगद्दल इलाके में बाजार बंद हो गए और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई
प्रधानमंत्री की रैली से पहले हुई इस हिंसा ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
- भारी बल की तैनाती: घटना के तुरंत बाद भारी संख्या में पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) को मौके पर भेजा गया। पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च किया है।
- सर्च ऑपरेशन: सुरक्षा बल घर-घर तलाशी ले रहे हैं ताकि और अधिक बम या हथियार बरामद किए जा सकें।
- चुनाव आयोग की नजर: चुनाव आयोग ने इस घटना पर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। संवेदनशील बूथों और इलाकों में सुरक्षा और कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
हिंसा के बाद दोनों प्रमुख दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री की रैली में उमड़ने वाली भीड़ से डरकर टीएमसी कार्यकर्ता जानबूझकर आतंक का माहौल बना रहे हैं ताकि मतदाता बाहर न निकलें। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा बाहरी लोगों को लाकर इलाके की शांति भंग कर रही है और अपनी हार तय देखकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है।
बंगाल चुनाव में जगद्दल की हिंसा यह दर्शाती है कि जमीन पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कितनी चरम पर है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए पूरे जिले में ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है और संदिग्ध गतिविधियों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी दल से हों।


