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    पहलगाम के खौफनाक आतंकी हमले के 1 वर्ष, 26 मासूमों की मौत और फिर हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’

    पहलगाम में हुए उस खौफनाक आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन वक्त की मरहम उन गहरे जख्मों को भरने में नाकाम रही है जो उस काली रात ने दिए थे। 21 अप्रैल 2025 को हुए उस कायराना हमले में 26 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गई थीं। आज एक साल बाद भी उन परिवारों के आंगन में केवल सूनापन, आंखों में बेबसी और यादों का सैलाब बाकी है।

    दर्द की कहानी, अपनों की जुबानी:

    हमले की पहली बरसी पर जब उन 26 परिवारों के घर का हाल देखा गया, तो मंजर दिल दहला देने वाला था। किसी ने अपना इकलौता सहारा खोया, तो किसी सुहागन का सिंदूर उजड़ गया।

    • बेबस मां की पुकार: हमले में अपने युवा बेटे को खोने वाली एक मां आज भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठी रहती है। उसे यकीन ही नहीं होता कि उसका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
    • मासूमों का इंतजार: कई छोटे बच्चे ऐसे हैं जिन्हें आज भी यह नहीं पता कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे आज भी हर त्योहार पर अपने पापा के आने और खिलौने लाने का इंतजार करते हैं।

    सुरक्षा के दावे और जमीनी हकीकत:

    इस हमले के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बड़े दावे किए गए थे। ऑपरेशन ‘क्लीन स्वीप’ के तहत कई आतंकियों को ढेर भी किया गया, लेकिन उन परिवारों के लिए ये आंकड़े बेमानी हैं। उनका कहना है कि “आतंकी तो मर गए, लेकिन हमारी खुशियां भी उनके साथ ही दफन हो गईं।”

    सूना पड़ा है पहलगाम का वो कोना

    जिस स्थान पर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, वहां आज भी सन्नाटा पसरा रहता है। स्थानीय लोग और पर्यटक वहां रुककर उन मृतकों को श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन उस जगह की हवाओं में आज भी वो चीखें महसूस की जा सकती हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा और नौकरियां देने का वादा किया था, जिनमें से कई प्रक्रियाएं अभी भी फाइलों में दबी हुई हैं।

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ : भारतीय सेना ने कहा “भारत भूलता नहीं है”

    पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी (21 अप्रैल 2026) के अवसर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation SINDOOR) एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय सेना ने आज ही सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी कर कहा है कि “भारत भूलता नहीं है।” यह ऑपरेशन भारत द्वारा पिछले साल (2025) किया गया एक अत्यंत आक्रामक और सफल सैन्य अभियान था। आतंकियों ने धर्म के आधार पर पहचान कर लोगों को निशाना बनाया था। इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके (PoJK) में घुसकर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के 9 प्रमुख लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी मारे गए।

    • त्रिकोणीय समन्वय (Tri-Service Synergy): इस ऑपरेशन में थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर काम किया। नौसेना ने अरब सागर में अपने कैरियर बैटल ग्रुप (CBG) को तैनात कर पाकिस्तानी नौसेना की हलचल रोक दी थी।
    • चार दिवसीय संघर्ष: पाकिस्तान की जवाबी गोलाबारी और ड्रोन हमलों के बाद स्थिति युद्ध जैसी हो गई थी। भारत ने लाहौर और गुजरांवाला के पास पाकिस्तानी रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया। अंततः 10 मई 2025 को पाकिस्तान के डीजीएमओ (DGMO) के अनुरोध पर युद्धविराम हुआ।

    गैर-सैन्य और आर्थिक प्रहार

    ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं था, भारत ने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए कड़े कदम उठाए:

    • सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty): भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया, जिससे पाकिस्तान के लिए पानी का संकट पैदा हो गया। ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’ का कड़ा संदेश दिया गया।
    • पूर्ण व्यापार प्रतिबंध: अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया गया और पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापार पर रोक लगा दी गई।
    • राजनयिक अलगाव: पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए और पाकिस्तानी कलाकारों व सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
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