संसद के विशेष सत्र के दौरान 17 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के कार्यान्वयन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर गरमागरम बहस हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस चर्चा में भाग लेते हुए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को स्पष्ट किया, लेकिन साथ ही सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।
राहुल गांधी के भाषण के मुख्य बिंदु:
- महिलाओं से सीखने का संदेश: राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत भावुक अपील के साथ की। उन्होंने कहा, “हम सभी ने महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है—धैर्य, शक्ति और निस्वार्थ भाव। महिला आरक्षण सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि भारत की आधी आबादी को उनका हक देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
- OBC आरक्षण की मांग: राहुल गांधी ने इस विधेयक को ‘अधूरा’ बताया। उन्होंने मांग की कि 33% महिला आरक्षण के भीतर OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि बिना जातिगत जनगणना के आंकड़ों के, पिछड़े वर्ग की महिलाओं को इस कानून का लाभ नहीं मिल पाएगा।
- परिसीमन (Delimitation) पर चिंता: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को “लोकतंत्र पर हमला” और “सत्ता हथियाने की कोशिश” (Power grab) करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन को जल्दबाजी में लागू किया गया, तो यह दक्षिणी राज्यों और छोटे प्रदेशों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर उत्तर भारत की तुलना में कम रही है।
- 2011 की जनगणना का विरोध: उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करना चाहती है जिसमें OBC डेटा नहीं है। उनका रुख स्पष्ट था कि आरक्षण 2027 की नई जनगणना और जातिगत डेटा के आधार पर ही लागू होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषण:
राहुल गांधी का यह भाषण दोहरे संदेश वाला था। एक तरफ उन्होंने महिला आरक्षण का सैद्धांतिक समर्थन किया, वहीं दूसरी तरफ इसे परिसीमन से जोड़ने को एक राजनीतिक जाल बताया। उन्होंने कहा, “अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो वह इसे बिना परिसीमन की शर्त के अभी लागू कर सकती है।”


