चिकित्सा जगत से एक ऐसी क्रांतिकारी खबर आई है जो दुनियाभर के करोड़ों टाइप-1 डायबिटीज मरीजों की जिंदगी बदल सकती है। वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार की जीन थेरेपी ‘KRIYA-839’ विकसित की है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि केवल एक इंजेक्शन के जरिए इस लाइलाज बीमारी को जड़ से ठीक किया जा सकेगा।
क्या है टाइप-1 डायबिटीज और क्यों थी यह लाइलाज?
टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का अपना ही इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज (अग्नाशय) की इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन बनना पूरी तरह बंद हो जाता है और मरीज को जीवित रहने के लिए जीवनभर रोजाना इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। अब तक इसे ठीक करने का कोई स्थायी उपाय नहीं था।
KRIYA-839 जीन थेरेपी: कैसे करती है काम?
‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज एंड ट्रीटमेंट्स फॉर डायबिटीज’ (ATTD 2026) में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, यह नई थेरेपी (AAV-based gene therapy) शरीर के काम करने के तरीके को ही बदल देती है:
- मांसपेशियां बनेंगी ‘इंसुलिन फैक्ट्री’: यह थेरेपी मांसपेशियों (Skeletal Muscles) में इंसुलिन और ग्लूकोकाइनेज (Glucokinase) जीन को इंजेक्ट करती है।
- स्वचालित नियंत्रण: इसके बाद शरीर की मांसपेशियां खुद ही इंसुलिन बनाना शुरू कर देती हैं और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार उसे नियंत्रित भी करती हैं।
- इंसुलिन से आजादी: इस प्रक्रिया के सफल होने पर मरीज को बाहर से इंसुलिन लेने या इम्यून दबाने वाली दवाओं (Immunosuppressants) की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मेडिकल ब्रेकथ्रू के मुख्य बिंदु
- सिंगल डोज इलाज: यह ‘वन-टाइम’ जीन थेरेपी है, यानी जीवन में सिर्फ एक बार इंजेक्शन लेने की जरूरत होगी।
- सफल परीक्षण: पशु मॉडल पर किए गए परीक्षणों में इस थेरेपी ने न केवल बीमारी को पूरी तरह खत्म किया, बल्कि स्वास्थ्य को सामान्य स्तर पर लाकर उम्र भी बढ़ाई।
- कोई साइड इफेक्ट नहीं: यह थेरेपी ब्लड शुगर को बहुत कम (Hypoglycemia) किए बिना संतुलित रखती है।
भविष्य की राह
कैलिफोर्निया स्थित कंपनी Kriya Therapeutics इस शोध को क्लिनिकल ट्रायल (मानवीय परीक्षण) के अगले चरण में ले जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह इंसानों पर भी उतनी ही प्रभावी रही, तो 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने के साथ-साथ हम ‘डायबिटीज मुक्त भारत’ की ओर भी बड़े कदम बढ़ा सकेंगे।
“यह शोध टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक नया जीवनदान है, जो दशकों से इंसुलिन की सुइयों पर निर्भर थे।” — हेल्थ एक्सपर्ट्स


