अप्रैल 2026 की शुरुआत में उत्तर भारत के मौसम ने करवट बदली है। पिछले 24 घंटों के दौरान हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक ओर भीषण गर्मी से राहत मिली है और तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह मौसम आफत बनकर बरसा है।
फसलों पर कुदरत की मार
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने पकी हुई फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
- गेहूं और सरसों: कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। ओलों की वजह से दाने झड़ गए हैं और फसल की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।
- बागवानी: आम और लीची के बागों में भी ओलावृष्टि के कारण बौर (फूल) गिर गए हैं, जिससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
तापमान में गिरावट, बर्फबारी का सीधा असर
इस बेमौसम बारिश के कारण उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में अधिकतम तापमान में 5°C से 8°C तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली-एनसीआर में अचानक हुई बारिश ने अप्रैल के महीने में भी हल्की ठंड का अहसास करा दिया है। पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी हुई है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों की हवाओं पर पड़ा है।
राज्यों का हाल: एक नज़र में
| राज्य | मौसम की स्थिति | प्रभाव |
| दिल्ली-एनसीआर | झमाझम बारिश और तेज हवाएं | जलभराव और यातायात प्रभावित |
| उत्तर प्रदेश | पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि | गेहूं और सरसों की फसल को 40% तक नुकसान |
| पंजाब-हरियाणा | भारी बारिश और आंधी | मंडियों में रखे अनाज के भीगने की खबर |
| राजस्थान | कई जिलों में ओले गिरे | चने और जीरे की फसल प्रभावित |
| उत्तराखंड | पहाड़ों पर बर्फबारी, मैदानों में बारिश | चारधाम यात्रा की तैयारियों में बाधा |
मौसम विभाग (IMD) का पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण यह बदलाव आया है।
“अगले 48 घंटों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की भी संभावना है।”
प्रशासन की तैयारी
विभिन्न राज्य सरकारों ने जिला प्रशासन को फसलों के नुकसान का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके। साथ ही, मंडियों में खुले में रखे अनाज को सुरक्षित करने के लिए तिरपाल और उचित भंडारण की व्यवस्था करने को कहा गया है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की चुनौतियों को रेखांकित किया है, जहाँ अप्रैल जैसे महीने में किसान को गर्मी के बजाय ओलावृष्टि का सामना करना पड़ रहा है।


