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    अमेरिका में भी महंगाई की चौतरफा मार, ईरान से युद्ध का पड़ रहा यह असर

    ईरान के साथ बढ़ते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध का सबसे सीधा और कड़ा प्रहार अमेरिकी जनता की जेब पर पड़ा है। युद्ध और तेल आपूर्ति में बाधा के कारण अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे आम नागरिकों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है।

    तेल के बिल में भारी बढ़ोतरी

    ईरान संकट शुरू होने के बाद से अमेरिकी ड्राइवरों को ईंधन के लिए औसतन 30% से 45% तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

    • गैलन के दाम: अमेरिका के कई राज्यों, विशेषकर कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क में, पेट्रोल (Gasoline) की कीमतें $5.50 से $6.00 प्रति गैलन के पार निकल गई हैं।
    • अतिरिक्त बोझ: एक अनुमान के मुताबिक, एक औसत अमेरिकी परिवार को अब ईंधन पर हर महीने पहले के मुकाबले $150 से $200 (लगभग 12,500 से 16,500 रुपये) अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।

    होर्मुज संकट और आपूर्ति श्रृंखला

    वैश्विक कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की धमकियों और अमेरिकी नौसेना की वहां मौजूदगी ने बीमा लागत और शिपिंग शुल्कों में भारी वृद्धि कर दी है।

    • ब्रेंट क्रूड का असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 115 डॉलर के पार जाने का असर सीधे अमेरिकी पंपों पर दिख रहा है।
    • स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR): हालांकि बाइडन प्रशासन ने रणनीतिक भंडार से तेल छोड़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन बाजार की घबराहट कम नहीं हो रही है।

    ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं है:

    1. माल ढुलाई (Logistics): डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण ग्रॉसरी और आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो गई है, जिससे सुपरमार्केट में सामानों के दाम बढ़ गए हैं।
    2. हवाई किराया: विमानन ईंधन (ATF) महंगा होने से अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों में 20-25% की बढ़ोतरी देखी गई है।
    3. उपभोक्ता विश्वास: महंगाई के कारण आम लोगों ने विवेकाधीन खर्च (Discretionary spending) में कटौती कर दी है, जिसका असर अमेरिकी रिटेल सेक्टर पर पड़ रहा है।

    राजनीतिक दबाव

    राष्ट्रपति चुनाव के करीब आते ही ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी और मौजूदा प्रशासन की नीतियों के बीच आम अमेरिकी पिस रहा है। ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी नीतियों से तेल की कीमतें कम होंगी, जबकि वर्तमान स्थिति के लिए उन्होंने विदेश नीति की विफलताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

    ईरान के साथ युद्ध ने न केवल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि अमेरिका के भीतर एक ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ संकट पैदा कर दिया है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें $125 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।

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