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    NASA का आर्टेमिस-II लॉन्च, 10 दिनों का होगा मिशन, जानें क्या होगा अंतरिक्ष में?

    नासा (NASA) ने अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस-II (Artemis-II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। 1972 में अपोलो-17 के बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) को छोड़कर चंद्रमा की ओर रवाना हुआ है। यह मिशन फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39B से शाम 6:35 बजे (EDT) लॉन्च किया गया। अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए भेजा गया है, जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है। यह ओरियन (Orion) कैप्सूल को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाने की क्षमता रखता है।अंतरिक्ष यात्री ‘इंटीग्रिटी’ (Integrity) नामक ओरियन कैप्सूल में सवार हैं, जिसे विशेष रूप से गहरे अंतरिक्ष के अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।


    इतिहास रचने वाले चार अंतरिक्ष यात्री

    इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं, जो अपने आप में एक मिसाल हैं:

    1. रीड वाइसमैन (Reid Wiseman): मिशन कमांडर।
    2. विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): पायलट (चंद्रमा मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति)।
    3. क्रिस्टीना कोच (Christina Koch): मिशन स्पेशलिस्ट (चंद्रमा मिशन पर जाने वाली पहली महिला)।
    4. जेरेमी हैन्सन (Jeremy Hansen): मिशन स्पेशलिस्ट (कनाडा के नागरिक और पहले गैर-अमेरिकी जो चंद्रमा की यात्रा पर हैं)।

    10 दिनों का मिशन: क्या होगा अंतरिक्ष में?

    यह एक ‘लूनर फ्लाईबाई’ (Lunar Flyby) मिशन है, जिसका अर्थ है कि अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसकी परिक्रमा करेंगे।

    • पृथ्वी की कक्षा में परीक्षण: लॉन्च के बाद शुरुआती 24 घंटे ओरियन कैप्सूल पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहेगा ताकि उसके लाइफ सपोर्ट सिस्टम और नेविगेशन की जांच की जा सके।
    • चंद्रमा की यात्रा: इसके बाद यह चंद्रमा की ओर बढ़ेगा और उसकी सतह से लगभग 7,600 किलोमीटर की ऊंचाई से गुजरेगा।
    • वापसी: चंद्रमा का चक्कर लगाकर यह कैप्सूल सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में लैंड करेगा। इस पूरे सफर में करीब 10 दिन का समय लगेगा।

    भविष्य की तैयारी: आर्टेमिस-III का रास्ता साफ

    आर्टेमिस-II की सफलता 2028 में होने वाले आर्टेमिस-III मिशन के लिए नींव रखेगी, जिसके तहत इंसान 50 से अधिक वर्षों के बाद फिर से चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। नासा का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थायी बेस बनाना और वहां से मंगल (Mars) जैसे ग्रहों तक की पहुंच आसान करना है।

    इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में सबसे तेज़ गति और पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी (करीब 4 लाख किलोमीटर) का रिकॉर्ड भी बनाने की तैयारी की है।

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