ईरान के खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर संभावित अमेरिकी हमले और कब्जे की खबरों ने पश्चिम एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस द्वीप पर जमीनी हमला करता है, तो यह न केवल सैन्य बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत ‘महंगा’ साबित हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
ईरान की युद्धस्तर पर तैयारियां
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने खर्ग द्वीप को एक अभेद्य किले में बदल दिया है:
- सुरक्षा घेरा: द्वीप पर MANPADS (कंधे से दागे जाने वाले विमान भेदी मिसाइल) और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं।
- घातक जाल (Traps): तटों पर अमेरिकी मरीन के लैंडिंग क्षेत्रों में एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछाई गई हैं।
- सैनिकों की तैनाती: द्वीप पर अतिरिक्त कमांडो और सैन्य कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है।
अमेरिका के लिए बड़े खतरे
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खर्ग द्वीप पर कब्जा करना अमेरिका के लिए ‘आत्मघाती’ हो सकता है:
- सैनिकों की भारी क्षति: मैनहट्टन के एक-तिहाई आकार वाले इस द्वीप पर कब्जा करने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों की जरूरत होगी, जिससे बड़ी संख्या में हताहतों का खतरा है।
- आर्थिक तबाही: खर्ग द्वीप ईरान के 90% कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है। यहाँ जरा सी भी क्षति वैश्विक तेल आपूर्ति में 15 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी ला सकती है।
- तेल की कीमतों में उछाल: विश्लेषकों का अनुमान है कि पूर्ण हमले की स्थिति में तेल की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे अमेरिका सहित दुनिया भर में भीषण महंगाई और मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।
रणनीतिक स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुलवाने के लिए खर्ग द्वीप को एक “लिवर” के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि, रिटायर्ड एडमिरल मार्क मोंटगोमरी जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य जीत की गारंटी के बिना इतने बड़े जोखिम उठाना रणनीतिक रूप से समझदारी नहीं होगी।


