पश्चिम एशिया में जारी गहरे तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में ऐतिहासिक कटौती का फैसला किया है। कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से जूझ रही तेल विपणन कंपनियों, एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी को राहत देने के लिए उठाया गया है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
सरकार का बड़ा फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है। सरकार ने संकट की गंभीरता को देखते हुए करों को न्यूनतम स्तर पर लाने का निर्णय लिया है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर केवल 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह समाप्त करते हुए इसे शून्य (0) कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम मुख्य रूप से ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया है।
- डीजल की कीमतों में कमी से माल ढुलाई सस्ती होगी, जिससे फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकेगा।
- पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने के डर से जनता में व्याप्त घबराहट को शांत करना।
- परिवहन लागत कम होने से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे अतिरिक्त दबाव को कम करने का प्रयास।
जनता के लिए संदेश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। उत्पाद शुल्क में इस कटौती का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता से बचाना है।


