उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से शुरू हुआ जासूसी का यह मामला अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में सामने आया है। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का जाल गुजरात से लेकर पंजाब तक फैला हुआ था। मुख्य आरोपी समीर उर्फ शूटर की गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
जासूसी का डिजिटल नेटवर्क: 17 फोन और 183 वीडियो
पुलिस ने जब समीर को गिरफ्तार किया, तो उसके पास से 17 मोबाइल फोन बरामद हुए। इन फोनों की जांच में 183 वीडियो और तस्वीरें मिली हैं, जिनमें भारत के कई संवेदनशील इलाकों की रेकी की गई थी।
- रेकी का दायरा: समीर ने केवल दिल्ली या यूपी ही नहीं, बल्कि गुजरात, राजस्थान और पंजाब के सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और वीवीआईपी रूटों की भी रेकी की थी।
- पाकिस्तानी कनेक्शन: समीर सीधे तौर पर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर सरफराज उर्फ सरदार के संपर्क में था। वह टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए ये जानकारियां सीमा पार भेज रहा था।
सीसीटीवी (CCTV) लगाने का ‘खतरनाक’ टास्क
इस पूरे मामले में सबसे डरावना खुलासा CCTV कैमरों को लेकर हुआ है। पाकिस्तान से समीर और उसके गिरोह को विशेष निर्देश मिले थे:
- लाइव फीड: गिरोह को दिल्ली के कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत जैसे संवेदनशील इलाकों में चोरी-छिपे छोटे वाई-फाई वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम दिया गया था।
- मकसद: इन कैमरों का मकसद भारतीय सेना की आवाजाही और महत्वपूर्ण ट्रेन रूटों की लाइव वीडियो फीड सीधे पाकिस्तान पहुंचाना था।
- तकनीक: ये कैमरे सोलर पावर से चलते थे ताकि इन्हें बिजली की जरूरत न पड़े और इन्हें मोबाइल हॉटस्पॉट से जोड़कर इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से कनेक्ट किया गया था।
अब तक की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 18 से अधिक लोगों को पकड़ चुकी हैं, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं जिन्हें पैसों का लालच देकर इस काम में लगाया गया था। जांच में पता चला है कि हर सफल वीडियो या फोटो भेजने के लिए इन्हें 5,000 से 10,000 रुपये दिए जाते थे। अब तक इस नेटवर्क को पाकिस्तान से करीब 15 लाख रुपये की फंडिंग मिलने की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के ‘स्पाई कैमरे’ लगाए गए हैं।


