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    ईरान के ‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड पर हमले से अमेरिका और इजरायल के मजबूत रिश्तों में दरार

    मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्ष ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। ईरान के ‘साउथ पार्स’ (South Pars) गैस फील्ड पर इजरायल के अकेले हमले ने अमेरिका और इजरायल के बीच के मजबूत रिश्तों में दरार डाल दी है। विशेष रूप से, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं।

    यहाँ इस पूरे विवाद और युद्ध की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:


    विवाद की मुख्य वजह: साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला

    ईरान का ‘साउथ पार्स’ दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है। इजरायल ने हाल ही में अमेरिका को भरोसे में लिए बिना इस रणनीतिक स्थान पर हमला कर दिया।

    • अमेरिका की नाराजगी: ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा।
    • इजरायल का पक्ष: नेतन्याहू का तर्क है कि ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ (गैस और तेल) पर हमला करना उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकने का एकमात्र तरीका है।

    ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बढ़ती खाई

    कभी एक-दूसरे के सबसे करीबी सहयोगी माने जाने वाले ट्रंप और नेतन्याहू के बीच अब विश्वास की कमी दिख रही है।

    1. एकतरफा फैसला: रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि इजरायल ने इतने बड़े सैन्य ऑपरेशन की जानकारी वाशिंगटन को नहीं दी।
    2. क्षेत्रीय अस्थिरता: अमेरिका चाहता है कि युद्ध को सीमित रखा जाए ताकि खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब) के साथ उसके संबंध और व्यापार प्रभावित न हों। वहीं, नेतन्याहू ‘अंतिम युद्ध’ की तर्ज पर ईरान को पूरी तरह पंगु बनाना चाहते हैं।
    3. ट्रंप की चेतावनी: सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप ने इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कटौती या उसे धीमा करने के संकेत दिए हैं यदि इजरायल ने अपनी ‘विनाशकारी’ नीति नहीं बदली।

    वैश्विक और क्षेत्रीय परिणाम

    • ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने इस हमले को ‘आर्थिक आतंकवाद’ करार दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी है, जिससे दुनिया का 20% तेल व्यापार रुक सकता है।
    • अरब देशों की चिंता: यूएई और कतर जैसे देश इस हमले से सकते में हैं। उन्हें डर है कि इजरायल-ईरान की जंग में उनकी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

    क्या अमेरिका इजरायल का साथ छोड़ देगा?

    हालांकि अमेरिका पूरी तरह से इजरायल का साथ नहीं छोड़ेगा, लेकिन ‘चेक एंड बैलेंस’ की स्थिति पैदा हो गई है। ट्रंप प्रशासन अब इजरायल पर युद्ध विराम या कम से कम हमले रोकने के लिए दबाव बना रहा है। नेतन्याहू के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

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