आज का दिन भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ है। एक तरफ जहां घरेलू शेयर बाजार युद्ध की आहट से कांप उठा, वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में ऐसी ही अस्थिरता (Volatility) बनी रहेगी। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं।
शेयर बाजार: सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट
घरेलू शेयर बाजार पर ‘जंग का साया’ साफ नजर आया। वैश्विक तनाव और मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ती अस्थिरता के कारण दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली हुई। सेंसेक्स (Sensex) बाजार खुलते ही सेंसेक्स 1953 अंक टूट गया, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। निफ्टी भी 23,200 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। इस गिरावट से निवेशकों की लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मिनटों में स्वाहा हो गई। बैंकिंग और आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मार पड़ी है।
सर्राफा बाजार: सोना और चांदी हुए सस्ते
शेयर बाजार के साथ-साथ सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भाव तेजी से नीचे आए हैं:
- चांदी की चमक आज फीकी पड़ गई और यह ₹5,000 प्रति किलो तक सस्ती हो गई।
- सोने की कीमतों में भी प्रति 10 ग्राम भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खरीदारों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
- सोना प्रति 10 ग्राम 1,52,054 रुपये पर और चांदी प्रति किलो 5,111 रुपये गिरकर 2,43,083 पर आ गई।
3. गिरावट के 3 प्रमुख कारण
बाजारों में आए इस भूचाल के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जा रहे हैं:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला: यूएस फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और भविष्य के लिए ‘हॉकिश’ (कठोर) संकेत दिए हैं। इससे डॉलर मजबूत हुआ और कीमती धातुओं के भाव गिर गए।
- भू-राजनीतिक तनाव (War Cloud): मध्य-पूर्व में युद्ध की बढ़ती आशंकाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
- रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती साख ने भी बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ा है।


