असम की राजनीति में 18 मार्च 2026 को एक बड़ा भूचाल आ गया, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और नगांव (Nowgong) से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बोरदोलोई का जाना असम कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे राज्य में पार्टी के सबसे अनुभवी और बौद्धिक चेहरों में से एक थे।
इस्तीफे का कारण, ‘अपमान और अकेलापन’
प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस आलाकमान को भेजे अपने त्याग पत्र में पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण गिनाए:
- राजनीतिक अलगाव: बोरदोलोई ने कहा कि वे लंबे समय से पार्टी के भीतर ‘अकेलापन’ महसूस कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्हें दरकिनार किया जा रहा था।
- अपमानजनक व्यवहार: उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पार्टी के प्रति उनकी दशकों की निष्ठा के बदले उन्हें केवल अपमान मिला। उनके अनुसार, “पार्टी अब अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कद्र करना भूल गई है।”
- भविष्य की अनिश्चितता: बोरदोलोई ने संकेत दिया कि कांग्रेस का वर्तमान ढांचा असम की क्षेत्रीय अस्मिता और चुनौतियों से लड़ने में असमर्थ है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है। प्रद्युत बोरदोलोई जैसे वरिष्ठ नेता का जाना यह दर्शाता है कि अब वहां आत्मसम्मान वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं बची है। मैंने पहले ही कहा था कि चुनाव आते-आते असम कांग्रेस पूरी तरह खाली हो जाएगी।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या बोरदोलोई भाजपा (BJP) में शामिल होंगे, तो मुख्यमंत्री ने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि “अच्छे लोगों के लिए विकास की राजनीति में हमेशा दरवाजे खुले रहते हैं।”
कांग्रेस के लिए क्या हैं मायने?
- लोकसभा चुनाव से पहले संकट: 2026 के राजनीतिक समीकरणों के बीच एक मौजूदा सांसद का इस्तीफा कांग्रेस की सांगठनिक शक्ति को कमजोर करेगा।
- नेतृत्व पर सवाल: बोरदोलोई के इस्तीफे ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है।
प्रद्युत बोरदोलोई के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे या तो भाजपा में शामिल हो सकते हैं या किसी क्षेत्रीय दल के साथ नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं।


