पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक भीषण युद्ध का रूप ले चुका है। 17 और 18 मार्च 2026 को हुई घटनाओं ने इस क्षेत्र को विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा इस्राइल पर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों और उसके जवाब में अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में की गई भारी बमबारी ने वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
‘क्लस्टर वारहेड’ का इस्तेमाल
ईरान ने अपने सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए इस्राइल पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस्राइली चिकित्सा सेवा ‘मैगन डेविड एडोम’ के अनुसार, तेल अवीव के पास रमत गन (Ramat Gan) जिले में हुए मिसाइल हमले में दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। खबरों के मुताबिक, ईरान ने इस हमले में ‘क्लस्टर वारहेड’ वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे मध्य इस्राइल में भारी तबाही हुई और तेल अवीव में सायरन की गूंज के साथ जोरदार धमाके सुने गए।
अमेरिका का ‘बंकर बस्टर’ प्रहार
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा करने के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भीषण कार्रवाई की। अमेरिका ने ईरान के तट पर स्थित सुरक्षित और मजबूत मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए 5,000 पाउंड के ‘बंकर बस्टर’ (Deep Penetrator Munitions) बमों का इस्तेमाल किया।
- लक्ष्य: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरान के एंटी-शिप क्रूज मिसाइल ठिकाने।
- हथियार: CENTCOM ने पुष्टि की कि उन्होंने कई 5,000 पाउंड के बम गिराए, जो कंक्रीट और जमीन के गहरे भीतर बने ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम हैं।
- प्रभाव: इन हमलों से ईरान की समुद्री रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग को फिर से खोलने की कोशिश की जा रही है।
ट्रंप का सहयोगियों पर निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध के बीच अपने सहयोगियों और नाटो (NATO) देशों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने होर्मुज में सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, “हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है,” और चेतावनी दी कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वैश्विक परिणाम
इस सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह पोर्ट और कुवैत पर भी ड्रोन हमलों की खबरें हैं, जिससे पूरा खाड़ी क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस रहा है।


