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    ट्रंप ने खेला बड़ा कूटनीतिक दांव, होर्मुज पर इन 7 देशों से मांगी मदद?

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप ने दुनिया के सात प्रमुख देशों से सैन्य और सामरिक सहयोग की मांग की है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20-25% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ईरान ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमले नहीं रुके, तो वह इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर सकता है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

    ट्रंप ने इन 7 देशों से क्यों मांगी मदद?

    ट्रंप प्रशासन ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत और इटली जैसे देशों से अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात करने की अपील की है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

    1. साझा जिम्मेदारी: ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका अकेले दुनिया के “समुद्री पुलिसकर्मी” की भूमिका नहीं निभा सकता। चूंकि इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं इस मार्ग से आने वाले तेल पर निर्भर हैं, इसलिए सुरक्षा का खर्च और जोखिम भी इन्हें उठाना चाहिए।
    2. ईरान पर दबाव: सात बड़े देशों का एक साथ आना ईरान के लिए एक कड़ा संदेश होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एकजुट है।
    3. चीन और जापान की निर्भरता: चीन और जापान जैसे देश मध्य-पूर्व के तेल पर सबसे अधिक निर्भर हैं। ट्रंप चाहते हैं कि ये देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए खुद सक्रिय हों।

    वैश्विक टकराव की आशंका

    ईरान ने अमेरिका के इस कदम को ‘भड़काऊ’ करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि बाहरी शक्तियों की उपस्थिति क्षेत्र में स्थिरता लाने के बजाय संघर्ष को और बढ़ाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, यदि अन्य देश अपने युद्धपोत भेजते हैं, तो ईरान के साथ सीधी सैन्य भिड़ंत का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे यह संघर्ष एक बड़े वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।

    तेल संकट और अर्थव्यवस्था पर असर

    इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचने लगी हैं। यदि होर्मुज मार्ग बंद होता है, तो मुद्रास्फीति (महंगाई) अनियंत्रित हो सकती है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों की जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा।


    ट्रंप का यह आह्वान केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि सहयोगियों को जिम्मेदारी बांटने की उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है। अब देखना यह है कि ये सात देश अमेरिका के इस ‘गठबंधन’ में शामिल होते हैं या तटस्थ रहने का विकल्प चुनते हैं।

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