पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को दो चरणों में आयोजित करने के निर्णय के पीछे मुख्य रूप से सुरक्षा, चुनावी हिंसा को नियंत्रित करने का इतिहास और प्रशासनिक दक्षता जैसे कारण हैं। निर्वाचन आयोग (ECI) के इस कदम के पीछे के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
चुनावी हिंसा का इतिहास
पश्चिम बंगाल का चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। ऐसे में दो चरणों में मतदान कराने से कानून-व्यवस्था (Law and Order) को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और सुरक्षा बलों की तैनाती को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का प्रयोग सफल रहा था, जिससे हिंसा में कमी आई थी।
सुरक्षा बलों की उपलब्धता
चुनाव आयोग को पूरे देश में विभिन्न राज्यों के चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की उपलब्धता का प्रबंधन करना होता है। असम और अन्य राज्यों के चुनावों के बाद, सुरक्षा बलों को बंगाल भेजा जाएगा, जिससे दो चरणों में चुनाव कराना प्रशासनिक रूप से अधिक व्यावहारिक है।
राजनीतिक दलों की माँग
सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर, अन्य सभी राजनीतिक दलों ने आयोग से चुनाव की प्रक्रिया को कम से कम समय में संपन्न कराने की मांग की थी। पहले की तुलना में (जैसे 2021 में 8 चरण) चरणों की संख्या कम करने का प्रयास आयोग द्वारा इस मांग के जवाब में किया गया है।
प्रशासनिक और चुनाव सुधार
अधिक चरणों में चुनाव कराने से आचार संहिता लंबी अवधि तक लागू रहती है, जिससे सरकारी कामकाज पर प्रभाव पड़ता है। दो चरणों में चुनाव कराकर आयोग चुनावी प्रक्रिया को कम समय में समाप्त करने और प्रशासनिक दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है।


