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    पहाड़ी राज्यों में भी लू जैसी स्थिति, जानें क्यों कम हुआ सर्दी-गर्मी के बीच का अंतर?

    मार्च 2026 में देश भर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है। मार्च की शुरुआत से ही देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) का असर देखा जा रहा है, जो आम तौर पर मई के महीने में महसूस होता है।

    मौसम के बदलते पैटर्न के मुख्य बिंदु:

    • असामान्य गर्मी: इस वर्ष मार्च की शुरुआत में ही तापमान सामान्य से 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है। गुजरात (सौराष्ट्र और कच्छ), महाराष्ट्र (विदर्भ), और पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया है।
    • पहाड़ से मैदान तक असर: केवल मैदानी इलाके ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भी लू जैसी स्थिति देखी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में यह सबसे जल्दी दर्ज की गई गर्मी है।
    • जलवायु परिवर्तन का संकेत: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सर्दी और गर्मी के बीच का अंतर कम होता जा रहा है। यह असामान्य बदलाव जलवायु परिवर्तन और मौसम के अनिश्चित पैटर्न की ओर इशारा करता है।
    • विविधतापूर्ण स्थितियाँ: जहाँ एक ओर देश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड) में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण छिटपुट बर्फबारी और बारिश की संभावना बनी हुई है। उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी हल्की बारिश का अनुमान है।

    क्या आगे राहत की उम्मीद है?

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 14 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित मैदानी इलाकों में तापमान में मामूली गिरावट और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। हालांकि, मौजूदा समय में हीटवेव के प्रति सावधानी बरतनी आवश्यक है, विशेषकर दोपहर के समय बाहर निकलने वाले लोगों और किसानों के लिए।

    यह स्थिति स्पष्ट करती है कि इस बार गर्मी का मौसम समय से पहले और कहीं अधिक तीव्रता के साथ दस्तक दे चुका है, जिसके लिए प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर सतर्कता की आवश्यकता है।

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