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    ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिरा, सदन में हुई वापसी, विपक्ष को दी यह सीख

    संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान एक ऐतिहासिक और नाटकीय घटनाक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत (Voice Vote) से गिर गया है। बुधवार को हुई तीखी बहस के बाद, गुरुवार को ओम बिरला ने पुनः अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।

    कभी-कभी कड़े फैसले लेने पड़ते हैं

    अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान परंपरा का पालन करते हुए ओम बिरला सदन की कार्यवाही से दूर रहे थे (उनकी जगह जगदंबिका पाल ने पीठ संभाली थी)। प्रस्ताव खारिज होने के बाद आज उन्होंने वापस आकर कहा, “सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने के लिए कभी-कभी कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। यह पद किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे सदन का संरक्षक है।”

    अमित शाह का प्रहार

    चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी चुनावी हार की खीझ निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं और अब स्पीकर पर निशाना साध रहा है। शाह ने तंज कसते हुए कहा, “सदन कोई मेला नहीं है, इसे नियमों के अनुसार चलना होगा।”

    विपक्ष के आरोप

    कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर का व्यवहार पक्षपातपूर्ण है और वे विपक्ष के माइक बंद कर देते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सदन पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है, केवल एक पार्टी का नहीं, और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है।

    प्रस्ताव गिरने की वजह

    जब सदन में मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच ‘डिवीजन’ (विभाजन) की मांग नहीं की गई, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को खारिज घोषित कर दिया।

    सत्र की अन्य हलचल: स्पीकर के मुद्दे के अलावा, संसद में एलपीजी (LPG) संकट, मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम और एयर इंडिया के बढ़ते हवाई किरायों पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा है।

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