रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका द्वारा भारत को दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट (Waiver) पर भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस “अनुमति” वाले बयान को भारत की संप्रभुता और गरिमा का अपमान बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि एक 140 करोड़ की आबादी वाला देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वाशिंगटन की मंजूरी का मोहताज कैसे हो सकता है।
कांग्रेस के सरकार से 5 तीखे सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने सरकार को घेरते हुए निम्नलिखित सवाल पूछे हैं:
- “अनुमति” शब्द पर आपत्ति: कांग्रेस ने पूछा कि अमेरिका भारत को तेल खरीदने की “इजाजत” देने वाला कौन होता है? क्या भारत अब एक स्वतंत्र राष्ट्र के बजाय किसी देश का अधीनस्थ (Vassal State) बन गया है?
- सरकार की चुप्पी क्यों? व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा भारत को “Good Actor” (अच्छे व्यवहार वाला) कहने पर सरकार चुप क्यों है? क्या यह भारत के आत्मसम्मान का अपमान नहीं है?
- ब्लैकमेल की राजनीति: जयराम रमेश ने तंज कसते हुए पूछा कि “अमेरिकी ब्लैकमेल” कब तक चलेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बाहरी दबाव के आगे घुटने टेक रही है।
- रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) कहां है? राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमारे इतिहास और भूगोल पर आधारित होनी चाहिए, न कि किसी बाहरी ताकत के आदेशों पर। क्या सरकार ने देश की रणनीतिक स्वायत्तता को गिरवी रख दिया है?
- अदानी और एपस्टीन फाइल का जिक्र: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री किसी “व्यक्तिगत कमजोरी” या फाइलों के डर से अमेरिका के सामने झुक रहे हैं?
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि उसने भारतीय रिफाइनरों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी है। अमेरिका ने कहा कि भारत ने उसकी बात मानकर पहले रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, इसलिए एक “अच्छे सहयोगी” के नाते उसे यह अस्थायी राहत दी जा रही है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो।
सरकार का पक्ष
हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन भाजपा समर्थकों और कुछ सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह ‘डिप्लोमैटिक जीत’ है, जिससे युद्ध के समय में भी भारत को सस्ता तेल मिल पा रहा है और ऊर्जा संकट का खतरा टल गया है।


