ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने न केवल मिडिल ईस्ट, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भारी तनाव पैदा कर दिया है। रविवार, 1 मार्च 2026 को पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
यहाँ इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी गई है:
कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला
ईरान में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत खामेनेई की मौत की पुष्टि होने के कुछ ही घंटों बाद कराची के एम.टी. खान रोड पर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (US Consulate) के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई।
- हिंसा की शुरुआत: प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश की। भीड़ ने दूतावास की खिड़कियां तोड़ दीं, फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया और परिसर के एक हिस्से में आग लगा दी।
- सुरक्षा बलों की कार्रवाई: स्थिति को बेकाबू होते देख वहां तैनात पाकिस्तानी पुलिस, अर्धसैनिक बलों (Rangers) और कथित तौर पर दूतावास की सुरक्षा में लगे अमेरिकी जवानों ने फायरिंग शुरू कर दी।
- जानी नुकसान: अस्पताल के सूत्रों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस झड़प में अब तक 8 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। घायलों में कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
पाकिस्तान के अन्य शहरों में भी तनाव
कराची के अलावा पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शनों की आग फैल गई है:
- लाहौर: यहाँ भी अमेरिकी दूतावास के बाहर शिया संगठनों ने बड़ा मार्च निकाला और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
- गिलगित-बाल्टिस्तान: खबरों के अनुसार, उत्तेजित भीड़ ने यहाँ संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक कार्यालय को निशाना बनाया और आगजनी की।
ईरान-इजरायल युद्ध का वैश्विक असर
खामेनेई की मौत ने मुस्लिम जगत में गहरा आक्रोश पैदा किया है। पाकिस्तान में हुए ये प्रदर्शन इसी गुस्से का नतीजा हैं।
- रास्ते बंद: कराची पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सुल्तानाबाद और माई कोलाची की ओर जाने वाली सड़कों को पूरी तरह सील कर दिया है।
- हाई अलर्ट: पूरे पाकिस्तान में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पाकिस्तानी सरकार ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन प्रदर्शनकारी ‘बदले’ की मांग पर अड़े हैं।
- ट्रंप की चेतावनी: इस हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया है कि अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमले हुए, तो इसका अंजाम ईरान और उसके समर्थकों के लिए बहुत बुरा होगा।
अयातुल्ला खामेनेई का जाना केवल ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कराची की हिंसा संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है।


