प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25-26 फरवरी 2026 की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा से पहले रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। इजरायल के महावाणिज्यदूत (Consul General) यानिव रेवाच ने संकेत दिए हैं कि इजरायल अपनी विश्व प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) वायु रक्षा प्रणाली की तकनीक भारत के साथ साझा करने को तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान रक्षा, कृषि और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को एक “ग्लोबल सुपरपावर” बताते हुए इस रक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का एक नया अध्याय बताया है।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत मिलेगी तकनीक
महावाणिज्यदूत रेवाच ने स्पष्ट किया कि यह केवल हथियारों की खरीद-बिक्री का सौदा नहीं होगा। इजरायल तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के लिए तैयार है, जिसका अर्थ है कि ‘आयरन डोम’ जैसी प्रणालियों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में ही किया जा सकेगा।
कितना ताकतवर है आयरन डोम?
आयरन डोम को दुनिया की सबसे प्रभावी कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसकी सफलता दर 90% से अधिक है। यह हवा में ही रॉकेट, मोर्टार और छोटे ड्रोन्स को ट्रैक कर उन्हें नष्ट कर देता है। यह रडार की मदद से गणना करता है कि आने वाला रॉकेट किसी रिहायशी इलाके में गिरेगा या खाली मैदान में। यह केवल उन्हीं खतरों को मार गिराता है जो आबादी वाले क्षेत्रों के लिए खतरा होते हैं। भारत के लिए यह तकनीक सीमाओं पर होने वाली गोलाबारी और ड्रोन घुसपैठ को रोकने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ को मिलेगी मजबूती
भारत अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए ‘सुदर्शन चक्र’ (Sudarshan Chakra) प्रोग्राम पर काम कर रहा है। इजरायल के साथ यह सहयोग भारत को मल्टी-लेयर एयर डिफेंस ग्रिड तैयार करने में मदद करेगा, जिसमें आयरन डोम के अलावा ‘आयरन बीम’ (लेजर आधारित सिस्टम) और उन्नत मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं।


