अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के बीच टैरिफ नीति को लेकर बड़ा टकराव शुरू हो गया है। 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले से तिलमिलाए राष्ट्रपति ट्रंप ने अदालत के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी और तुरंत 10% वैश्विक शुल्क (Universal Baseline Tariff) लगाने का नया आदेश जारी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट) का गलत इस्तेमाल कर कांग्रेस की शक्तियों का उल्लंघन किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
ट्रंप का ‘सुप्रीम’ पलटवार
अदालत के फैसले से नाराज ट्रंप ने इसे “हास्यास्पद” और “देश के लिए शर्मनाक” बताया। फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने ओवल ऑफिस से एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए।
- 10% नया टैरिफ: ट्रंप ने सभी देशों से आने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त वैश्विक शुल्क लगाने का एलान किया है।
- सेक्शन 122 का इस्तेमाल: इस बार उन्होंने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है। यह कानून भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की आपात स्थिति में राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
- अस्थायी लेकिन सख्त: यह नया शुल्क लगभग 5 महीनों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसके दौरान प्रशासन ‘अनुचित व्यापार प्रथाओं’ की जांच करेगा ताकि भविष्य में और भी कड़े स्थायी टैरिफ लगाए जा सकें।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ट्रंप के इस कदम से भारत, चीन, कनाडा और यूरोपीय संघ सहित दुनिया भर के देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कलेक्ट किए गए अरबों डॉलर के पुराने टैरिफ की वापसी (Refund) की मांग भी तेज हो सकती है, जो अमेरिकी खजाने के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।


