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    AI क्षेत्र में भारत करेगा दुनिया का नेतृत्व, विशेषज्ञों ने कहा-करने होंगे ये काम

    नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे और पांचवें दिन (19-20 फरवरी) भारत को वैश्विक एआई पावरहाउस बनाने पर गहन चर्चा हुई। उद्योग जगत के दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि भारत के पास एआई क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता है।

    बड़े निवेश के साथ ‘आत्मनिर्भर एआई’ का संकल्प

    सम्मेलन में भारतीय और वैश्विक उद्योगपतियों ने भारत के डिजिटल भविष्य के लिए अपनी तिजोरियां खोलने की घोषणा की:

    • मुकेश अंबानी (रिलायंस इंडस्ट्रीज): उन्होंने आगामी सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का एलान किया। अंबानी ने कहा कि जिस तरह जियो ने डेटा को सस्ता और सुलभ बनाया, उसी तरह रिलायंस अब ‘इंटेलिजेंस’ को सस्ता बनाएगा। उन्होंने संकल्प लिया कि भारत इंटेलिजेंस को “किराये पर नहीं लेगा”, बल्कि खुद विकसित करेगा।
    • जीत अदाणी (अदाणी समूह): उन्होंने एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 अरब डॉलर की योजना साझा की, जो हरित ऊर्जा (Green Energy) द्वारा संचालित होगी। उनका मानना है कि एआई आने वाले समय में राष्ट्रीय संप्रभुता की परिभाषा बदल देगा।
    • वैश्विक दिग्गजों का समर्थन: माइक्रोसॉफ्ट ने डेटा सेंटर्स और प्रशिक्षण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये, जबकि अमेज़न ने 2030 तक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश का भरोसा दिया।

    टेक दिग्गजों का नजरिया: भारत क्यों है खास?

    दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों ने भारत की ऊर्जा और प्रतिभा की सराहना की:

    • सैम ऑल्टमैन (OpenAI): ऑल्टमैन ने कहा कि भारत फिलहाल एआई को अपनाने (Adoption) के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
    • सुंदर पिचाई (Google): उन्होंने विजाग (Vizag) में 1 GW एआई हब बनाने की योजना की पुष्टि की। उन्होंने जोर दिया कि एआई न केवल तकनीकी बदलाव लाएगा, बल्कि विज्ञान की जटिल समस्याओं को सुलझाने में भी मदद करेगा।
    • ऋषि सुनक (पूर्व ब्रिटिश पीएम): उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि एआई बहुत कुछ कर सकता है, पर शायद दिल्ली का ट्रैफिक नहीं सुधार सकता। हालांकि, उन्होंने गंभीर होते हुए कहा कि स्टैनफोर्ड की रैंकिंग के अनुसार भारत अब एक एआई सुपरपावर के रूप में स्थापित है।

    मुख्य निष्कर्ष: पावरहाउस बनने के लिए क्या चाहिए?

    सम्मेलन में विशेषज्ञों ने भारत को पावरहाउस बनाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा:

    1. स्वदेशी मॉडल्स (Sovereign AI): भारत को अपनी भाषाओं और डेटा पर आधारित फाउंडेशनल मॉडल्स विकसित करने होंगे।
    2. सस्ता एआई: तकनीक को आम नागरिकों की पहुंच में लाने के लिए लागत को डेटा की तरह ही कम करना होगा।
    3. बुनियादी ढांचा: बड़ी संख्या में GPUs और डेटा सेंटर्स की स्थापना, जिस पर सरकार ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत 10,372 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

    “जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा, अब जियो भारत को इंटेलिजेंस युग से जोड़ेगा।” — मुकेश अंबानी

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