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    रेवड़ी नहीं, रोजगार दें, मुफ्त की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की फिर कड़ी टिप्पणी

    सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक दलों द्वारा दी जाने वाली “मुफ्त की योजनाओं” (Freebies) पर एक बार फिर कड़ी टिप्पणी की है। गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारों का ध्यान जनता को केवल मुफ्त सुविधाएं बांटने पर नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने पर होना चाहिए।

    1. मुफ्त सुविधाएं बनाम आत्मनिर्भरता

    न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि हर चीज को ‘मुफ्त’ देना न केवल राज्य के खजाने पर बोझ डालता है, बल्कि यह नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन पर निर्भरता पैदा करता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

    • “रेवड़ी नहीं, रोजगार दें”: जनता को ऐसी सुविधाएं दी जानी चाहिए जो उन्हें लंबे समय में आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं, न कि वे केवल सरकारी सब्सिडी पर आधारित रहें।
    • विकास पर असर: जब बजट का एक बड़ा हिस्सा मुफ्त बिजली, पानी या नकद सहायता में चला जाता है, तो बुनियादी ढांचे (सड़क, शिक्षा, अस्पताल) और रोजगार सृजन के लिए पैसा कम पड़ जाता है।

    2. तमिलनाडु बिजली बोर्ड (TNEB) का उदाहरण

    सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से तमिलनाडु बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति का हवाला दिया। कोर्ट ने पाया कि मुफ्त बिजली और अत्यधिक सब्सिडी के कारण बिजली बोर्ड भारी कर्ज में डूबा हुआ है।

    • अदालत ने सवाल उठाया कि “यदि राज्य की संस्थाएं (PSUs) दिवालिया हो जाएंगी, तो भविष्य में सेवाएं कैसे सुनिश्चित की जा सकेंगी?”

    3. आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा

    कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि मुफ्त की योजनाओं (Freebie Culture) पर लगाम नहीं लगाई गई, तो कई राज्य वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकते हैं।

    • असंतुलन: सरकारें वोट पाने के लिए ऐसी घोषणाएं कर देती हैं जिन्हें पूरा करना राज्य की वर्तमान जीडीपी के हिसाब से असंभव होता है।
    • सुझाव: कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से इस दिशा में कड़े दिशा-निर्देश बनाने या एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    निष्कर्ष और प्रभाव

    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन राज्यों के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है जहाँ हाल ही में मुफ्त योजनाओं के दम पर चुनाव लड़े गए हैं। यह बहस अब इस दिशा में मुड़ गई है कि क्या ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) की परिभाषा केवल मुफ्त वस्तुओं तक सीमित है या इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के जरिए नागरिकों का सशक्तिकरण शामिल है।

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