कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और संगठन संरचना पर जो प्रहार किया है, उसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने न केवल संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल पर व्यक्तिगत हमला किया, बल्कि खुद को ‘राहुल-वादी’ मानने से भी इनकार कर दिया।
केसी वेणुगोपाल पर ‘गुंडा’ वाली टिप्पणी
मणिशंकर अय्यर ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में केसी वेणुगोपाल के बढ़ते प्रभाव पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “क्या आप सोच सकते हैं कि उस पार्टी की क्या हालत होगी जो केसी वेणुगोपाल जैसे गुंडे को सरदार पटेल और राहुल गांधी के स्तर तक ले जाती है? जवाब में मुझे बस इतना ही कहना है।”
अय्यर का यह बयान पार्टी के भीतर पुराने बनाम नए नेताओं के बीच चल रही वर्चस्व की जंग को उजागर करता है। वेणुगोपाल को राहुल गांधी का सबसे करीबी माना जाता है, और उन पर इस तरह का प्रहार सीधे तौर पर राहुल गांधी की टीम की पसंद पर सवाल उठाना है।
“मैं राहुल-वादी नहीं हूँ”
अपनी वैचारिक निष्ठा को स्पष्ट करते हुए अय्यर ने कहा कि वह किसी व्यक्ति विशेष के अनुयायी नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी निष्ठा पार्टी की विचारधारा और नेहरूवादी मूल्यों के प्रति है। उन्होंने कहा, “मैं राहुल-वादी (Rahul-vadi) नहीं हूँ। मैं एक कांग्रेसी हूँ जो पार्टी के सिद्धांतों में विश्वास रखता है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान राहुल गांधी की कार्यशैली और उनके द्वारा चुने गए सलाहकारों के प्रति अय्यर की बढ़ती दूरी का संकेत है।
अय्यर की नाराजगी के संभावित कारण
- उपेक्षा का भाव: पार्टी के पुराने दिग्गजों (Old Guard) को लगता है कि नई टीम में उन्हें वह सम्मान और जगह नहीं मिल रही है, जिसके वे हकदार हैं।
- संगठनात्मक निर्णय: केसी वेणुगोपाल द्वारा राज्यों में किए जा रहे बदलाव और नियुक्तियों से पार्टी का एक धड़ा बेहद असंतुष्ट है।
- नेहरूवादी बनाम आधुनिक कांग्रेस: अय्यर खुद को नेहरू के सिद्धांतों का रक्षक मानते हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान नेतृत्व उन मूल्यों से भटक रहा है।
पार्टी पर प्रभाव
मणिशंकर अय्यर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस कई राज्यों में अंदरूनी कलह से जूझ रही है। असम में भूपेन बोरा का इस्तीफा और अब केरल में अय्यर का यह हमला दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। भाजपा ने इस स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा है कि कांग्रेस अब “विनाश काले विपरीत बुद्धि” की राह पर है।
मणिशंकर अय्यर के इन तेवरों ने कांग्रेस आलाकमान को असहज कर दिया है। जहाँ एक तरफ पार्टी एकजुटता का संदेश दे रही है, वहीं अय्यर जैसे दिग्गजों के ऐसे बयान पार्टी की आंतरिक दरारों को सार्वजनिक कर रहे हैं।


