कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने एक बार फिर अपने बयानों से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोलते हुए उसे ‘शैतान’ करार दिया और भारतीय जनता पार्टी को उस शैतान की ‘छाया’ बताया। खरगे के इस बयान के बाद राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
फंडिंग और कानूनी स्थिति पर उठाए सवाल
प्रियांक खरगे ने केवल तीखी टिप्पणियां ही नहीं कीं, बल्कि संघ की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आरएसएस एक पंजीकृत संस्था है या नहीं? खरगे ने आरोप लगाया कि:
- वित्तीय पारदर्शिता: संघ को मिलने वाली फंडिंग का स्रोत क्या है? उन्होंने मांग की कि संघ को अपनी आय और व्यय का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।
- संवैधानिक जवाबदेही: खरगे ने सवाल उठाया कि एक ऐसी संस्था जो देश की नीति निर्धारण और भाजपा के निर्णयों पर इतना प्रभाव डालती है, वह किसी संवैधानिक दायरे या ऑडिट के अंतर्गत क्यों नहीं आती?
‘भाजपा केवल एक मुखौटा है’
मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा स्वतंत्र रूप से काम नहीं करती, बल्कि वह आरएसएस के एजेंडे को लागू करने वाला एक माध्यम मात्र है। उन्होंने कहा, “असली शैतान नागपुर में बैठा है और भाजपा उसकी परछाई की तरह काम कर रही है।” उनके अनुसार, देश में जो भी विभाजनकारी नीतियां लागू की जा रही हैं, उनकी पटकथा संघ द्वारा ही लिखी जाती है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
प्रियांक खरगे के इस बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि खरगे का बयान उनकी हताशा को दर्शाता है। भाजपा प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है जो समाज सेवा और चरित्र निर्माण का काम करता है, जबकि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण की राजनीति में विश्वास रखती है। भाजपा ने खरगे से इस “अपमानजनक” टिप्पणी के लिए माफी की मांग की है।
प्रियांक खरगे का यह बयान राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है। जहाँ कांग्रेस इसे वैचारिक लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे करोड़ों स्वयंसेवकों का अपमान मान रही है।


