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    बांग्लादेश : 17 साल के वनवास के बाद BNP की धमाकेदार वापसी, अगले PM होंगे तारिक रहमान

    बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और यह देश के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है। 17 साल के वनवास के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता में धमाकेदार वापसी की है।

    शेख हसीना के देश छोड़ने और अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के बाद हुए इन ऐतिहासिक चुनावों में तारिक रहमान की अगुवाई वाली BNP ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। यहाँ इस चुनाव परिणाम से जुड़ी 10 बड़ी बातें दी गई हैं:


    बांग्लादेश चुनाव 2026: 10 प्रमुख बातें

    1. BNP की बंपर जीत: 300 सदस्यीय संसद (जातीय संसद) में से 299 सीटों पर हुए मतदान में BNP ने बहुमत का जादुई आंकड़ा (151) पार कर लिया है। पार्टी और उसके सहयोगियों ने 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाई है।
    2. अगले प्रधानमंत्री होंगे तारिक रहमान: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से भारी अंतर से जीत दर्ज की है।
    3. 17 साल बाद सत्ता में वापसी: यह जीत BNP के लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। 2001 के बाद यह पहली बार है जब पार्टी ने चुनाव में ऐसी प्रचंड जीत हासिल की है।
    4. जमात-ए-इस्लामी का सूपड़ा साफ: कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी, जो अवामी लीग की अनुपस्थिति में बड़े फायदे की उम्मीद कर रही थी, उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी दहाई के आंकड़ों में ही सिमट कर रह गई है।
    5. अवामी लीग की अनुपस्थिति: तीन दशकों में पहली बार, शेख हसीना की अवामी लीग का ‘नौका’ चुनाव चिन्ह मतपत्रों से गायब था। पार्टी पर प्रतिबंध के कारण वह इस दौड़ से बाहर रही।
    6. जनमत संग्रह और सुधार: संसदीय चुनाव के साथ-साथ एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह (Referendum) भी कराया गया, जिसमें जनता ने संवैधानिक सुधारों और ‘जुलाई चार्टर’ के पक्ष में भारी मतदान किया।
    7. युवाओं का दबदबा: 2024 के छात्र आंदोलन (Gen Z uprising) के बाद यह पहला चुनाव था। करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं में से बड़ी संख्या युवाओं की थी, जिन्होंने इस बदलाव में मुख्य भूमिका निभाई।
    8. शांतिपूर्ण मतदान: छिटपुट हिंसा की खबरों के बीच, चुनाव आयोग ने इसे पिछले दशकों का सबसे शांतिपूर्ण और उत्सवपूर्ण चुनाव बताया है। सुरक्षा के लिए लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात थे।
    9. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिका सहित कई देशों ने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना की है। अमेरिकी दूतावास ने तारिक रहमान और बांग्लादेश की जनता को इस “ऐतिहासिक जीत” पर बधाई दी है।
    10. जश्न पर रोक: अपनी माँ और पूर्व पीएम खालिदा जिया के हालिया निधन के सम्मान में, तारिक रहमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सड़कों पर जीत का जश्न न मनाने और इसके बजाय शुक्रवार की नमाज के बाद प्रार्थना करने का निर्देश दिया है।

    आगे क्या?

    तारिक रहमान के सामने अब बांग्लादेश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सुधारने और लोकतांत्रिक संस्थानों को फिर से जीवित करने की बड़ी चुनौती है। भारत के लिए भी यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार के साथ कूटनीतिक संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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