संसद के बजट सत्र के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक नया वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने न केवल सदन की, बल्कि लोकसभा स्पीकर के गरिमापूर्ण कार्यालय की मर्यादा को भी तार-तार कर दिया है।
किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20 से 25 सांसद जबरन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुस गए।
- गाली-गलौज और धमकी: रिजिजू के अनुसार, सांसदों ने स्पीकर के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें धमकाया। उन्होंने कहा, “वहां जो गाली-गलौज हुई, वह मैं बता भी नहीं सकता। स्पीकर बहुत नरम दिल इंसान हैं, वरना अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती।”
- वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जब यह सब हो रहा था, तब प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने सांसदों को रोकने की कोशिश नहीं की।
‘अनुमति के बिना बोलना’ और राहुल गांधी पर प्रहार
रिजिजू ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी पलटवार किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
- संसदीय नियम: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि “सदन में चाहे देश के प्रधानमंत्री हों या कोई सांसद, हर किसी को चेयर (अध्यक्ष) की अनुमति लेकर ही बोलना होता है। कोई भी अपनी मर्जी से नियम तोड़कर नहीं बोल सकता।”
- 4 फरवरी की घटना का सच: रिजिजू ने एक पुराना वीडियो भी साझा किया (4 फरवरी का), जिसमें महिला कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास घेराव करती दिख रही हैं। रिजिजू का तर्क है कि इसी असुरक्षा और हंगामे के कारण प्रधानमंत्री उस दिन सदन में भाषण देने नहीं आए थे।
टकराव की जड़: अविश्वास प्रस्ताव और सुरक्षा
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया।
- विपक्ष का तर्क: कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी को बोलने से रोका गया और स्पीकर पक्षपात कर रहे हैं।
- सत्ता पक्ष का जवाब: बीजेपी का कहना है कि विपक्ष ‘बच्चों वाली हरकतें’ कर रहा है और देश की सुरक्षा व लोकतांत्रिक संस्थानों को राजनीतिक हथियार बना रहा है।
किरेन रिजिजू के इन खुलासों और वीडियो ने संसद की कार्यवाही पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सरकार अब इन सांसदों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है।


